पन्ना। बुंदेलखंड के पन्ना की धरती को रत्नों की जननी कहा जाता है, लेकिन यहां चमकते हीरे तक पहुंचने की राह सिर्फ मेहनत से नहीं गुजरती, बल्कि आस्था, अंधविश्वास और रहस्यमयी टोटकों के जाल से भी होकर निकलती है, खदानों में काम करने वाले मजदूरों का मानना है कि हीरा चंचल होता है और उसे पाने के लिए सिर्फ पसीना बहाना काफी नहीं, बल्कि अदृश्य शक्तियों को भी खुश करना पड़ता है।
हीरापुर और सरकोहा जैसे इलाकों में बुधवार और रविवार को किए जाने वाले टोटके सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, मजदूर बताते हैं कि श्मशान के मटके से पानी लाकर खदानों में छिड़काव किया जाता है ताकि अतृप्त शक्तियां प्रसन्न होकर गुप्त धन का रास्ता खोल दें, इतना ही नहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में खदान की चाल पर शारीरिक संबंध बनाना भी शुभ माना जाता है, ताकि धरती की शक्ति जागृत हो सके और हीरे मिलने के रास्ते खुल जाएं।
अंधविश्वास की हद तब पार होती दिखती है जब महिलाओं को खदानों में पैर पकड़कर घसीटने जैसे टोटके किए जाते हैं, यह मान्यता है कि उनके मुंह से निकला आशीर्वाद हीरे की प्राप्ति का रास्ता बना सकता है, इन परंपराओं को सुनकर जहां आधुनिक सोच सवाल खड़े करती है, वहीं स्थानीय लोगों के लिए यह उनकी आस्था और उम्मीद का हिस्सा बन चुका है।
हीरा पारखी भी मानते हैं कि जब कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलती, तो मजदूर आध्यात्म और टोटकों की ओर रुख करते हैं, विज्ञान इसे भूगर्भीय प्रक्रिया मानता है, लेकिन पन्ना के मजदूरों के लिए हीरा किस्मत, कर्म और इन रहस्यमयी मान्यताओं का मेल है, अब यह आस्था है या अंधविश्वास, लेकिन सच यही है कि हीरे की चमक ने यहां ऐसी परंपराओं को जन्म दे दिया है, जो जितनी रहस्यमयी हैं उतनी ही डरावनी भी।

