‘गवाह पलट गए तो क्या हुआ…’ नाक काटने वाले आरोपी को 3 साल की सजा, कोर्ट बोला- मेडिकल रिपोर्ट झूठ नहीं बोलती

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने साफ कर दिया कि अपराधी गवाहों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन वैज्ञानिक सबूतों से बच नहीं सकता। अपहरण कर युवक की नाक काटने के सनसनीखेज मामले में कोर्ट ने आरोपी को 3 साल की सजा सुनाई है, जबकि पीड़ित और गवाह दोनों ही अपने बयान से मुकर गए थे।

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “गवाह झूठ बोल सकते हैं, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट नहीं।” इस फैसले को न्याय व्यवस्था में एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है।

मामला साल 2018 का है, जब ग्वालियर के बहोड़ापुर इलाके में अजय परमार नाम के आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर विशाल उर्फ भोलू का अपहरण कर लिया था। मकान खाली कराने के विवाद में युवक को बेरहमी से पीटा गया और धारदार हथियार से उसकी नाक काट दी गई थी।

हैरानी की बात तब सामने आई जब कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़ित और उसका भाई दोनों अपने पुराने बयानों से पलट गए। उन्होंने अदालत में आरोपियों को पहचानने से भी इनकार कर दिया। बचाव पक्ष ने इसे समझौते का मामला बताते हुए आरोपी को बरी करने की मांग की।

लेकिन कोर्ट ने सिर्फ गवाहों के बदले बयान पर भरोसा नहीं किया। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, सीटी स्कैन और घटना के तुरंत बाद दर्ज हुई रिपोर्ट को सबसे अहम सबूत माना। मेडिकल जांच में नेजल बोन फ्रैक्चर की पुष्टि हुई थी, जिसने यह साबित कर दिया कि हमला हुआ था।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले “खुज्जी बनाम मध्य प्रदेश राज्य” का हवाला देते हुए कहा कि अगर वैज्ञानिक और मेडिकल सबूत मजबूत हों, तो गवाहों के मुकरने के बाद भी आरोपी को सजा दी जा सकती है।

अदालत के इस फैसले को उन अपराधियों के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है, जो गवाहों को डरा-धमकाकर या समझौते के जरिए बच निकलने की कोशिश करते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर सबूत मजबूत हैं, तो कानून अपना काम जरूर करेगा।

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