भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली की सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद पार्टी ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विरोध जताने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस का पूरा विधायक दल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में दिल्ली पहुंच गया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे इस मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मानते हैं और इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इसी क्रम में पार्टी नेतृत्व ने देश की राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा था, ताकि उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया जा सके और अपनी आपत्ति दर्ज कराई जा सके।
हालांकि, राष्ट्रपति से मुलाकात का समय नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव कर दिया। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक पहले बस के जरिए एमपी भवन से रवाना हुए थे, लेकिन बाद में पार्टी ने विरोध का तरीका बदलते हुए पैदल मार्च करने का फैसला लिया।
कांग्रेस ने घोषणा की है कि पार्टी के विधायक और वरिष्ठ नेता दिल्ली स्थित 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकालेंगे। इस मार्च के जरिए पार्टी नामांकन रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएगी और इसे लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधेगी।
दरअसल, मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके दस्तावेजों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई और बाद में नामांकन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में विवाद गहरा गया।
कांग्रेस का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और यह निर्णय दुर्भावनापूर्ण तरीके से लिया गया। पार्टी का कहना है कि बहुमत के पर्याप्त आंकड़े होने के बावजूद उन्हें राज्यसभा की यह सीट गंवानी पड़ी। इसी वजह से कांग्रेस लगातार इस फैसले के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संघर्ष कर रही है।
दिल्ली में प्रस्तावित यह पैदल मार्च कांग्रेस के उसी विरोध अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। अब इस पूरे घटनाक्रम पर देश की राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं कि आगे यह मामला किस दिशा में बढ़ता है और कांग्रेस अपने इस आंदोलन को किस तरह आगे लेकर जाती है।

