दिग्विजय सिंह के बयान पर एमपी में सियासी बवाल, बीजेपी का पलटवार, न्यायपालिका के सम्मान का उठाया मुद्दा

इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट को लेकर की गई टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा एतराज जताया है। बीजेपी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है।

इंदौर में बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी नामांकन प्रक्रिया में त्रुटि हुई है, तो उसके लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए और अपनी गलतियों की समीक्षा करनी चाहिए।

वहीं, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के प्रति सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को बेहद संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने दिग्विजय सिंह की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित होती है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील भी की।

बीजेपी शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की टिप्पणी न्यायपालिका के प्रति असम्मान की भावना को दर्शाती है। उनका आरोप था कि कांग्रेस ने स्वयं नामांकन प्रक्रिया में त्रुटियां कीं और अब उसकी जिम्मेदारी दूसरों पर डालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर राजनीतिक दबाव और असंतोष के कारण इस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

दरअसल, यह पूरा विवाद राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम के बाद सामने आया है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। बीजेपी इसे न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान का विषय बता रही है, जबकि कांग्रेस इस पूरे मामले को अलग नजरिए से देख रही है।

दिग्विजय सिंह के बयान को लेकर अब प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो चुका है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस विवाद पर कांग्रेस की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर किसी कानूनी मोड़ तक पहुंचता है।

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