उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अधिक पुरुषोत्तम मास के चौथे बृहस्पतिवार पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन अवसर पर गुरु बृहस्पतेश्वर भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गई और महाकाल मंदिर परिसर में 1100 किलो फलों से सुसज्जित भव्य फल उत्सव का आयोजन किया गया। फलों की आकर्षक सजावट ने मंदिर प्रांगण को दिव्य और मनमोहक स्वरूप प्रदान कर दिया।
मंदिर के पुजारी नवनीत गुरु के अनुसार, भगवान गुरु बृहस्पतेश्वर को 31 प्रकार के फलों का विशेष महाभोग अर्पित किया गया। इससे पहले विधि-विधान के साथ भगवान का विभिन्न पवित्र रसों से अभिषेक किया गया और उनका भव्य श्रृंगार किया गया। मनोहारी श्रृंगार के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाआरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
फल उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में अलग-अलग प्रकार के फलों की सुंदर सजावट की गई। इस दिव्य आयोजन को देखने और भगवान के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की और भगवान गुरु बृहस्पतेश्वर से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।
महाआरती के पश्चात भगवान को अर्पित किए गए महाभोग और प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर पूरे समय भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।
मंदिर के पुजारी नवनीत गुरु ने बताया कि अधिक पुरुषोत्तम मास में आयोजित होने वाले विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में यह फल उत्सव अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर गुरु बृहस्पतेश्वर की पूजा-अर्चना करने से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है तथा गुरु ग्रह से जुड़े दोषों से भी मुक्ति मिलती है।
महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित इस भव्य फल उत्सव ने एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था को और प्रगाढ़ किया। भगवान महाकाल और गुरु बृहस्पतेश्वर के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा और भक्त भक्ति भाव में सराबोर नजर आए।

