नरसिंहपुर।नरसिंहपुर जिले में आज से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो रही है। शिक्षक स्कूलों में पहुंचकर तैयारियों में जुट गए हैं, लेकिन जिले के कई सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति ने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दर्जनों ऐसे स्कूल हैं जहां बच्चे जर्जर और खस्ताहाल भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
कहीं स्कूलों की छतों से लगातार पानी टपकता है तो कहीं दीवारों का प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई भवन इतने पुराने और कमजोर हो चुके हैं कि उनमें पढ़ाई करना बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
इधर मानसून की दस्तक भी कभी भी हो सकती है। ऐसे में इन जर्जर भवनों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। पिछले साल भी बरसात के दौरान कई सरकारी स्कूलों से अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आई थीं। कहीं बच्चों को टपकती छत से बचने के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ा था, तो कहीं भवन की खराब हालत के कारण स्कूल को अस्थायी रूप से दूसरे स्थान पर संचालित करना पड़ा था।
बरसात के मौसम में कई बार बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है, तो कहीं किराए के मकानों में कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि शिक्षा व्यवस्था के लिए हर साल जारी होने वाली करोड़ों रुपये की राशि आखिर खर्च कहां हो रही है?
जब स्कूल भवन ही सुरक्षित नहीं होंगे तो बच्चे पढ़ाई कैसे कर पाएंगे? क्या संबंधित विभाग और जिला प्रशासन ने इन जर्जर भवनों की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस योजना बनाई है? यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेने पर शिक्षकों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
नए सत्र की शुरुआत के साथ जहां बच्चों के भविष्य को संवारने की बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर जर्जर स्कूल भवनों की हकीकत शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन हालात में देश का भविष्य कहे जाने वाले ये बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कैसे कर पाएंगे?

