मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में ‘युवा संवाद’: देवकीनंदन जी महाराज ने युवाओं को दिए जीवन के सफलता मंत्र

​लक्ष्य प्राप्ति के लिए मेहनत, हिम्मत और लगन को बनाएं हथियार: देवकीनंदन जी महाराज

माता- पिता और गुरु का सम्मान ही सफलता का मूलमंत्र: देवकीनंदन जी महाराज

भोपाल,18 जून2026। मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में प्रख्यात कथावाचक देवकीनंदन जी महाराज ने युवाओं के साथ सीधा संवाद किया। कार्यक्रम का आयोजन मानसरोवर डेंटल कॉलेज प्रांगण में किया गया। जहाँ प्रसिद्ध कथावाचक गुरुदेव श्री देवकीनंदन जी महाराज ने वर्तमान पीढ़ी को सही दिशा, संस्कार और सफलता के मूल मंत्र बताए।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मानसरोवर समूह की चांसलर श्रीमती मंजुला तिवारी और प्रो-चांसलर इंजी. गौरव तिवारी ने देवकीनंदन महाराज जी का भव्य स्वागत किया। विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए देवकीनंदन महाराज जी ने कहा कि आधुनिक युग में पुराणों की शिक्षा को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को देवतुल्य माता- पिता और गुरु का सम्मान करने की सीख देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प ही सफलता की चाभी है।

​ चरित्र ही असली पूँजी
महाराज जी ने अपने संबोधन में चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने युवाओं को समझाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा, मनी इज़ गॉन, नथिंग इस गॉन। बट कैरेक्टर इस गॉन, एवरीथिंग इज़ गॉन। जीवन में धन-दौलत आ-जा सकती है, लेकिन एक बार चरित्र खो जाने पर सब कुछ नष्ट हो जाता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित रहें और कुसंगति से बचें।

​ माता-पिता और गुरु का सम्मान सर्वोपरि
अपने उपदेशों में उन्होंने भारतीय संस्कृति की धुरी—माता-पिता और गुरु के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता और गुरु का अनादर करता है, उसे जीवन में कभी भी वास्तविक सफलता प्राप्त नहीं हो सकती। सफलता की राह में बड़ों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन अनिवार्य है।

​परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म
संवाद के दौरान देवकीनंदन जी ने राष्ट्रवाद और धर्म के अंतर्संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है।” उन्होंने युवाओं को संगठित रहने और सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म का अर्थ किसी का बुरा करना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना है।

​ आधुनिकता और मानसिकता का संतुलन
आज के तकनीकी युग पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौड़ में हमें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण रखने की सलाह देते हुए उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने ‘माइंड’ को रिचार्ज करें, न कि केवल मोबाइल रिचार्ज करने पर ध्यान दें। उन्होंने मानसिक शांति और ध्यान को जीवन का आधार बताया।

​ युवाओं को दी नसीहत
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवाओं को जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए मेहनत, हिम्मत और लगन को अपना आधार बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब तक आप मेहनत करेंगे, तभी आपके सारे सपने साकार होंगे।

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