लखनऊ.उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपराध से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि कुछ लोग यह समझ रहे थे कि वह पुराने मुद्दों को भूल गए हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में दलितों और वंचित वर्गों के खिलाफ दर्ज मामलों के आंकड़े कई सच्चाइयों को सामने लाते हैं और इन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
राजभर ने आरोप लगाया कि विभिन्न पुलिस जोनों और कमिश्नरेट क्षेत्रों में दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनका संबंध समाजवादी पार्टी के समर्थक वर्गों से बताया जाता है। उन्होंने गोरखपुर, वाराणसी, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, बरेली, मेरठ और लखनऊ समेत कई क्षेत्रों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि इन मामलों में बड़ी संख्या में आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में गोरखपुर को लेकर विपक्ष द्वारा जो आरोप लगाए गए थे, उन पर जवाब देने के लिए ही उन्होंने यह आंकड़े साझा किए हैं। राजभर का कहना है कि अपराध और अत्याचार के मामलों पर राजनीति करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने रखा जाना चाहिए।
सुभासपा प्रमुख ने आगे कहा कि प्रदेश के कई शहरी कमिश्नरेट क्षेत्रों में भी दलित उत्पीड़न, मारपीट और अन्य गंभीर अपराधों के मामलों में बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई भेदभाव नहीं कर रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई जारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल सामाजिक न्याय की बात तो करते हैं, लेकिन जमीन पर उनके समर्थकों का व्यवहार उस सोच के अनुरूप नहीं दिखाई देता।
राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ उन्होंने अपराध के आंकड़ों के जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं। अब देखना होगा कि इस बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और यह सियासी बहस आगे किस दिशा में बढ़ती है।

