राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने पकड़ा तूल, हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल, उच्चस्तरीय न्यायिक जांच आयोग की मांग

अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान सामग्री को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में जांच कर रही एसआईटी अपनी पड़ताल पूरी कर चुकी है और अब अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है। इसी बीच इस पूरे प्रकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक नई जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की गई है।

दाखिल याचिका में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, अयोध्या के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मंदिर ट्रस्ट के सचिव को पक्षकार बनाया गया है। माना जा रहा है कि इस मामले पर अगले सप्ताह अदालत में सुनवाई हो सकती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

इस बीच दान सामग्री को लेकर भी कई नए दावे सामने आए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं दान की गई थीं। दावा किया जा रहा है कि देशभर के श्रद्धालुओं और व्यापारियों के सहयोग से बड़ी मात्रा में चांदी एकत्र कर विशेष रूप से तैयार कराई गई थी और उसे मंदिर निर्माण से जुड़े प्रतिनिधियों को सौंपा गया था।

इसके अलावा कुछ दानदाताओं ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने चांदी के दीपक, कटोरे और अन्य धार्मिक सामग्री मंदिर के लिए भेंट की थी। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद उन्हें इन वस्तुओं के उपयोग या वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं मिल सकी। इसी वजह से कई लोग अब दान सामग्री का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।

विवाद बढ़ने के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि दान में दी गई वस्तुओं और चढ़ावे का पारदर्शी हिसाब सामने आना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की शंका की स्थिति न बने। वहीं दूसरी ओर मंदिर से जुड़े पक्षों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा को तेज कर दिया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट और हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से यह साफ हो सकेगा कि विवाद के पीछे क्या तथ्य हैं और मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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