RDVV दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू का युवाओं को संदेश, बोलीं- शिक्षा का उपयोग सिर्फ खुद के लिए नहीं, समाज के लिए भी करें

जबलपुर। जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए शिक्षा, समाज और राष्ट्र निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए आधुनिक सोच और भारतीय परंपराओं का संतुलित समावेश बेहद जरूरी है। उन्होंने वीरांगना रानी दुर्गावती को नारी शक्ति, साहस और त्याग का प्रतीक बताते हुए युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया और इस बात पर खुशी जताई कि पुरस्कार पाने वाले छात्र-छात्राओं में बेटियों की संख्या अधिक रही। उन्होंने कहा कि यह बदलते भारत और समाज में बढ़ती महिला भागीदारी का सकारात्मक संकेत है। बेटियों की सफलता देश के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश करती है और यह दिखाती है कि महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में जनजातीय समाज और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन समुदायों को सही मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। जनजातीय समाज के पारंपरिक ज्ञान और कौशल को आधुनिक तकनीक और शिक्षा से जोड़कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण है।

शहरों में पढ़ाई और रोजगार के लिए रह रहे युवाओं से राष्ट्रपति ने विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को समय-समय पर अपने गांवों का दौरा करना चाहिए और वहां के लोगों, खासकर वंचित और पिछड़े वर्गों के युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। उनके अनुसार देश का संपूर्ण विकास तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग आगे बढ़े और विकास यात्रा में समान भागीदारी निभाए।

शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पाठ्यक्रमों में केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, सामाजिक समरसता और पिछड़े वर्गों के उत्थान जैसे विषयों को भी प्रमुखता मिलनी चाहिए। इससे विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और वे बेहतर नागरिक बन सकेंगे।

युवाओं को प्रेरित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आज डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, नवाचार और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे समय में युवाओं को अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग नए अवसरों को हासिल करने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल नौकरी या व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ समाज और राष्ट्र के विकास में भी दिखाई देना चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि बदलती दुनिया में नई तकनीकें और नए अवसर लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन हमारे नैतिक मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारियां हमेशा हमारी सबसे बड़ी ताकत रहेंगी। जब शिक्षा के साथ समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संकल्प जुड़ जाएगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *