सिंगरौली। सिंगरौली के पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एस.बी. सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह शहडोल संभाग में उन्हें सहायक संचालक का प्रभार सौंपा जाना है। इससे पहले उनका नाम शिक्षा विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं और लोकायुक्त जांच से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। ऐसे में उनकी नई नियुक्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
लोकायुक्त जांच के बाद फिर सुर्खियों में मामला
सिंगरौली शिक्षा विभाग का मामला पहले भी काफी चर्चा में रहा है। आरोप थे कि विभाग की विभिन्न योजनाओं, खरीद प्रक्रियाओं और वित्तीय लेन-देन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं। शिकायतों के बाद मामले की जांच शुरू हुई और जांच एजेंसियों ने भी कार्रवाई की। इसी कारण यह मामला लंबे समय तक प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।
नई जिम्मेदारी मिलने पर बढ़ी बहस
अब उसी मामले से जुड़े रहे पूर्व अधिकारी को शहडोल संभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने के बाद बहस फिर तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि जांच से जुड़े मामलों के बीच ऐसी नियुक्ति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं कुछ लोग इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर उठ रहे प्रश्न
इस फैसले के बाद शासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस तरह की जिम्मेदारियां सौंपे जाने से क्या संदेश जाता है। हालांकि इस मामले में अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय है।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक कोई दोषी नहीं
कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो किसी भी व्यक्ति के खिलाफ जांच या एफआईआर दर्ज होना उसे दोषी साबित नहीं करता। भारतीय न्याय व्यवस्था में आरोप साबित होने तक हर व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है। इसलिए इस मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
अब जांच की अगली कार्रवाई पर नजर
फिलहाल यह मामला एक बार फिर चर्चा में है और सबकी नजर आगे की जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले समय में जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अभी के लिए नई जिम्मेदारी और पुराने आरोपों का यह मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

