धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में इस बार मुहर्रम का माहौल कुछ अलग रहने वाला है। मुस्लिम समाज ने विरोध स्वरूप इस वर्ष पारंपरिक ताजिए और अखाड़े नहीं निकालने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला इमामबाड़ा सील होने के विरोध में लिया गया है, जिसे समाज अपनी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र मानता है।
मुरादपुर में विभिन्न अखाड़ों के खलीफा, ताजिया कमेटियों के सदस्य और समाज के गणमान्य लोग एकत्र हुए, जहां सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले ताजिए और अखाड़े अंत में इमामबाड़े पर पहुंचकर सलामी देते हैं। लेकिन वर्तमान में इमामबाड़ा प्रशासन द्वारा सील किया गया है, जिससे समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
समाज के लोगों ने स्पष्ट किया कि जब तक इमामबाड़ा नहीं खोला जाता, तब तक शहर में न तो अखाड़े निकाले जाएंगे और न ही ताजिए उठाए जाएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और कानून-व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द को किसी तरह की क्षति नहीं पहुंचाई जाएगी।
वहीं दूसरी ओर उज्जैन में मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा के नेतृत्व में शहर के संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में व्यापक फ्लैग मार्च निकाला गया।
यह फ्लैग मार्च महाकाल थाना क्षेत्र से शुरू होकर बेगमबाग, नलिया बाखल, उपकेश्वर, तोपखाना, दौलतगंज, नई सड़क, केडी गेट, गोपाल मंदिर, गुदरी चौराहा, कसाईवाड़ा और कोट मोहल्ला समेत कई संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरा। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों तथा गणमान्य लोगों से मुलाकात कर मुहर्रम का पर्व शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे के साथ मनाने की अपील की।
धार में ताजिए और अखाड़े नहीं निकालने का फैसला जहां चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं प्रशासन और समाज के बीच आगे क्या समाधान निकलता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

