ग्वालियर। देश के चर्चित पारिवारिक संपत्ति विवादों में शामिल सिंधिया राजपरिवार के मामले में एक बार फिर अंतिम फैसला टल गया है। ग्वालियर जिला न्यायालय में आज हुई सुनवाई के दौरान उम्मीद जताई जा रही थी कि दशकों पुराने इस विवाद का समाधान आपसी सहमति से हो जाएगा, लेकिन जरूरी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं हो सके।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड तलब किए थे, लेकिन सुनवाई के दौरान वे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई तय करते हुए रिकॉर्ड रूम से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सिंधिया राजपरिवार में पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद की शुरुआत करीब चार दशक पहले हुई थी। बाद में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद यह मामला उनके उत्तराधिकारियों और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा।
आज की सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच संभावित समझौते पर चर्चा हुई। माना जा रहा था कि सभी पक्ष अदालत में अपनी सहमति दर्ज कराकर इस लंबे विवाद का अंत कर देंगे, लेकिन दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।
सूत्रों के मुताबिक, पिछली सुनवाई के दौरान समझौते के कुछ बिंदुओं को लेकर भी आपत्तियां सामने आई थीं। ऐसे में दोनों पक्षों ने अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी।
बताया जाता है कि इस पैतृक संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये है। इसमें जयविलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, माधव विलास पैलेस, दिल्ली स्थित सिंधिया विला, ग्वालियर हाउस और वाराणसी के सिंधिया घाट जैसी कई ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित संपत्तियां शामिल हैं।
हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि समझौते के बाद किस वारिस को कौन-सी संपत्ति मिलेगी। इस पर अंतिम निर्णय अदालत की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।
करीब चार दशक से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद पर अब सभी की नजरें 28 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं, तो देश के सबसे चर्चित पारिवारिक मामलों में से एक का अंत हो सकता है।

