एमपी विधानसभा में नीट पर हंगामा! ई-अटेंडेंस, केन-बेतवा परियोजना और आदिवासी जमीन का मुद्दा भी गूंजा

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में कई अहम मुद्दों को लेकर जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरते हुए विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार बजट तो पेश करती है, लेकिन उसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट से प्रभावित छात्रों के मुद्दे पर सरकार चर्चा से बच रही है। विपक्ष ने इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव भी लाया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया कि यह मामला राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित नहीं है।

प्रश्नकाल के दौरान शिक्षकों की ई-अटेंडेंस का मुद्दा भी सदन में गूंजा। कांग्रेस विधायक सुनील उइके ने ई-अटेंडेंस सिस्टम की विश्वसनीयता और डेटा सुरक्षा पर सवाल उठाए। जवाब में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और अधिकांश स्थानों पर यह सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ इलाकों में नेटवर्क की समस्या है और डेटा सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है।

सदन में आदिवासी क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने आदिवासियों की जमीन गैर-जनजातीय लोगों को हस्तांतरित किए जाने के मामलों पर सवाल खड़े किए। इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

केन-बेतवा परियोजना भी चर्चा के केंद्र में रही। नेता प्रतिपक्ष ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे में अनियमितताओं का आरोप लगाया। सरकार की ओर से बताया गया कि हजारों परिवार इस परियोजना से प्रभावित हुए हैं और यदि किसी पात्र व्यक्ति को मुआवजा नहीं मिला है, तो उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा कि यदि कोई शिकायत सामने आती है, तो एक महीने के भीतर उसका निराकरण किया जाएगा।

इसके अलावा, चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी सदन में उठा। इस मामले में जांच की मांग की गई, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने विभागीय अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए।

विधानसभा के तीसरे दिन एक बार फिर यह साफ हो गया कि मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव जारी रहने वाला है। वहीं, आज सदन में निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 पर भी चर्चा और पारित होने की संभावना है।

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