इंदौर की रेल सुविधाओं को लेकर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक को एक विस्तृत पत्र लिखकर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने पत्र में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो पश्चिम रेलवे ने इंदौर को अनाथ समझ लिया हो। उनके इस बयान ने एक बार फिर इंदौर की रेल सुविधाओं और लंबे समय से लंबित मांगों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सुमित्रा महाजन ने अपने पत्र में कहा कि इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर को उसकी जरूरतों के अनुरूप रेल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने जयपुर-इंदौर और रीवा-इंदौर जैसी प्रस्तावित ट्रेनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई मेमू सेवा का भी जिक्र किया और कहा कि इंदौर से इसका रैक हटाकर पुराने डेमू रैक चलाए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा पुणे के लिए बंद पड़ी ट्रेन सेवा को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि इसे दोबारा शुरू करने के लिए रेलवे को गंभीरता से प्रयास करने चाहिए।
पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि पटना और गुवाहाटी जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके फेरों में अब तक कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि इस ट्रेन की उपयोगिता बेहद अधिक होने के बावजूद उसकी सेवाओं का विस्तार नहीं किया गया।
पत्र में महू-उज्जैन के बीच लोकल ट्रेन शुरू करने और अयोध्या के लिए सीधी रेल सेवा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है। उनका कहना है कि इन रूटों पर यात्रियों की संख्या काफी अधिक है और लंबे समय से लोग इन सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।
सुमित्रा महाजन ने सवाल उठाया कि करीब 40 लाख की आबादी वाले इंदौर क्षेत्र को क्या मौजूदा रेल सुविधाएं पर्याप्त कही जा सकती हैं? उन्होंने कहा कि लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और महू में अतिरिक्त लाइन क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद सुविधाओं का विस्तार नहीं होना चिंता का विषय है।
अपने पत्र के अंत में उन्होंने रेलवे प्रशासन से आग्रह किया कि इंदौर की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई ट्रेनों को मंजूरी दी जाए, बंद सेवाओं को बहाल किया जाए और लंबित प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लिया जाए।
अब यह पत्र रेलवे प्रशासन के सामने कई अहम सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम रेलवे इंदौर की इन मांगों पर क्या फैसला लेता है और शहर को उसकी प्रतीक्षित रेल सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।

