भोपाल। राजधानी भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष साईं रेड्डी ने एफपीओ यानी फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े मामलों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में किसानों के नाम पर चल रहे कई एफपीओ और क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और इनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
साईं रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार के मौजूदा एफपीओ और सहकारिता कानूनों में कई विसंगतियां हैं, जिसके कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की कि एफपीओ के संचालन के लिए एक अलग, पारदर्शी और प्रभावी कानून बनाया जाए, ताकि किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
किसानों की फसलों के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को मूंग की पूरी फसल की खरीदी सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, जो फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के दायरे से बाहर हैं, उन्हें भी भावांतर जैसी योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
साईं रेड्डी ने किसानों की आय को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों की आय कई गुना बढ़ाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन आज भी किसान कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर किसानों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
प्रेस वार्ता के दौरान माही नेशनल फेडरेशन ऑफ एफपीओ की वार्षिक बैठक की उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की गई। बताया गया कि वर्तमान में यह संगठन 12 राज्यों में सक्रिय है और इसका टर्नओवर 750 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। संगठन ने अगले वर्ष तक 20 राज्यों में विस्तार करने और 2,500 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य निर्धारित किया है।
साईं रेड्डी ने कहा कि किसानों को मजबूत बनाने के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि प्रभावी नीतियां और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। अब देखना होगा कि एफपीओ को लेकर उठी इन मांगों पर सरकार क्या कदम उठाती है और किसानों को कब तक राहत मिलती है।

