सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में शिक्षा की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी खुद गांवों की गलियों में उतर गईं। बच्चों की कम होती स्कूल उपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने सिर्फ स्कूलों का निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि अभिभावकों के घर-घर जाकर उनसे सीधा संवाद भी किया और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की।
देवसर विकासखंड के बरका और पिपरी क्षेत्र में पहुंचीं डीईओ ने शासकीय प्राथमिक विद्यालय नया टोला बरका, हाई स्कूल पिपरी और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरका का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई का स्तर देखा, शिक्षकों की उपस्थिति की जानकारी ली और विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जब कई कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षा से कम मिली, तो उन्होंने इसकी वजह जानने के लिए सीधे गांव का रुख किया। डीईओ गांव-गांव पहुंचीं, अभिभावकों से बातचीत की और खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों से भी पूछा कि आखिर बच्चे नियमित रूप से स्कूल क्यों नहीं आ रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने अभिभावकों को समझाया कि बच्चों का भविष्य शिक्षा से ही सुरक्षित और मजबूत बन सकता है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे अपने बच्चों को हर दिन स्कूल भेजें और उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें।
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों में विद्यार्थियों से भी संवाद किया। उन्होंने कक्षा 6, 7 और 9 के छात्रों से गणित, हिंदी और भाषा से जुड़े सवाल पूछे। कई बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिए, जबकि कुछ विद्यार्थियों को ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न हल करने के लिए कहा गया।
इसके साथ ही विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, शैक्षणिक माहौल और अन्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। डीईओ ने शिक्षकों को आवश्यक सुधार के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

