इंदौर में पोस्टर पॉलिटिक्स गरमाई! तुलसी सिलावट के गढ़ में गायब दिखी कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर, शुरू हुई सियासी चर्चाएं

इंदौर। इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पोस्टर पॉलिटिक्स ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। सांवेर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित भूमि पूजन और लोकार्पण कार्यक्रम के लिए लगाए गए बड़े-बड़े होर्डिंग्स और स्वागत पोस्टरों ने अचानक सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

दरअसल कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगाए गए पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट समेत कई नेताओं की तस्वीरें प्रमुखता से दिखाई दे रही हैं। लेकिन प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा के प्रभावशाली नेता कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर इन पोस्टरों से नदारद नजर आई, जिसके बाद राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू हो गया।

यह कार्यक्रम मंत्री तुलसीराम सिलावट के विधानसभा क्षेत्र सांवेर में आयोजित किया जा रहा है। ऐसे में पोस्टरों से कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मालवा और इंदौर की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा प्रभाव रहा है, इसलिए इतने बड़े सरकारी कार्यक्रम में उनकी तस्वीर का न दिखना चर्चा का विषय बन गया है।

इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे सामान्य चूक बता रहे हैं, जबकि कई राजनीतिक विश्लेषक इसे महज संयोग मानने को तैयार नहीं हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल पोस्टर लगाने वालों की गलती है या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है।

गौरतलब है कि तुलसीराम सिलावट वर्ष 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आने के बाद उन्होंने सांवेर क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई है। ऐसे में उनके क्षेत्र में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम के पोस्टरों को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।

हालांकि इस पूरे विवाद के बीच एक दिलचस्प तथ्य भी सामने आया है। कार्यक्रम स्थल पर मंच पर लगी कुर्सियों में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नाम की स्लिप लगी हुई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि वह कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं और आयोजन का हिस्सा भी रहेंगे।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा संगठन या कार्यक्रम आयोजकों की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक सफाई आती है या नहीं। फिलहाल पोस्टरों से शुरू हुई यह चर्चा इंदौर की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है और कार्यक्रम से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है।

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