जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित OBC आरक्षण मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लगातार जारी है। मामले की सुनवाई अब 10वें दिन में प्रवेश कर चुकी है और प्रदेशभर के लाखों युवाओं व अभ्यर्थियों की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं। आज दोपहर 2:30 बजे हाईकोर्ट में एक बार फिर इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई होगी।
पिछली सुनवाई के दौरान OBC पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अदालत के सामने कई अहम और तीखी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मूल आधार हमेशा से जनसंख्या रहा है, न कि क्वांटिफिएबल डाटा। उनका तर्क था कि जब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS को आरक्षण दिया गया, तब किसी विशेष डाटा की मांग नहीं की गई थी।
वकीलों ने अदालत में यह भी कहा कि केवल OBC आरक्षण के लिए अलग से डाटा की मांग करना न्यायसंगत नहीं है। उनके अनुसार, OBC आरक्षण को अधिक बताना संविधान में दिए गए प्रावधानों की भावना के विपरीत है।
सुनवाई के दौरान आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। OBC पक्ष के वकीलों ने दावा किया कि प्रदेश में एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को जोड़ने पर कुल आरक्षण पहले ही 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उनका कहना था कि EWS आरक्षण लागू होने के साथ ही 50 प्रतिशत की सीमा व्यावहारिक रूप से पार हो चुकी है।
इसके साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का दायित्व कानून की व्याख्या करना है, नया कानून बनाना नहीं। हाईकोर्ट ने OBC पक्ष की इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई आज दोपहर 2:30 बजे के लिए निर्धारित की है।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इस मामले का फैसला लाखों युवाओं और सरकारी नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

