40 हजार करोड़ की सिंधिया संपत्ति पर कोर्ट में सुनवाई: 1000 पन्नों का रिकॉर्ड पेश, अब 8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद में ग्वालियर जिला न्यायालय में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत के समक्ष लगभग एक हजार पन्नों का रिकॉर्ड पेश किया गया। दस्तावेजों की संख्या और मामले की जटिलता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की है।

इस मामले में सुनवाई का केंद्र बिंदु केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ स्वर्गीय पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी द्वारा दायर कैविएट रही। अदालत में इस कैविएट को निरस्त करने की मांग की गई, जिस पर दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पूर्व की कार्रवाई, दावा-आपत्ति, फैमिली सेटलमेंट से जुड़े दस्तावेज, राजीनामे और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए। बताया जा रहा है कि इन दस्तावेजों की कुल संख्या करीब एक हजार पन्नों तक पहुंच गई है।

दूसरे पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि कैविएट के साथ केवल आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जबकि उससे जुड़े आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए हैं। ऐसे में कैविएट को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता और इसे निरस्त किया जाना चाहिए। वहीं, अदालत ने रिकॉर्ड की व्यापकता को देखते हुए दस्तावेजों के अध्ययन के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता बताई और सुनवाई को आगे बढ़ा दिया।

मामले के दौरान एक और आपत्ति भी दर्ज कराई गई। इसमें कहा गया कि जिन राजीनामा दस्तावेजों पर कैविएट दायर करने वाले पक्ष की बहनों के हस्ताक्षर हैं, वे भी इस संपत्ति विवाद का हिस्सा हैं। ऐसे में सभी संबंधित पक्षों को सुने बिना कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। इस मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।

गौरतलब है कि करीब 40 हजार करोड़ रुपये की इस संपत्ति में ग्वालियर का ऐतिहासिक जयविलास पैलेस, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास, जॉर्ज कैसल कॉटेज, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, दिल्ली स्थित ग्वालियर हाउस, पुणे का पूर्व विलास पैलेस, सिंधिया छत्री और विदिशा का मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण संपत्तियां शामिल हैं।

फिलहाल अदालत ने इस मामले में कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है। अब इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद पर सभी की निगाहें 8 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *