नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम से सरकारी भंडारण व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस में रखी करोड़ों रुपये की सरकारी मूंग की जांच के दौरान ऐसा खुलासा हुआ, जिसने प्रशासन को भी हैरान कर दिया। जांच में कई बोरियों के अंदर मूंग की जगह मिट्टी और कंकड़-पत्थर पाए गए।
बताया जा रहा है कि कलेक्टर सोमेश मिश्रा को मिली गोपनीय शिकायत के बाद एसडीएम, जिला आपूर्ति अधिकारी और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने वेयरहाउस पर छापा मारा। रिकॉर्ड के अनुसार यहां करीब 31 हजार 298 क्विंटल मूंग का भंडारण किया गया था। जब अधिकारियों ने अलग-अलग स्टैक्स की जांच की, तो कई बोरियों में निर्धारित मानकों के अनुरूप अनाज नहीं मिला।
यह स्टॉक वर्ष 2023-24 और 2024-25 का बताया जा रहा है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 28 करोड़ 14 लाख रुपये है। जांच के बाद प्रशासन ने वेयरहाउस को तत्काल सील कर दिया है। लैब रिपोर्ट में भी मिलावट की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस कनकधारा वेयरहाउस को पहले अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, उसे दोबारा सरकारी भंडारण की अनुमति कैसे दी गई? अब इस फैसले को लेकर भी जांच तेज हो गई है।
जिला विपणन अधिकारी की शिकायत पर माखननगर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित, तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम होसले और जिला प्रबंधक वासुदेव डवडे को आरोपी बनाया है। इन पर धोखाधड़ी और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इधर, कार्रवाई की जानकारी सामने आते ही वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित के अस्पताल में भर्ती होने की खबर भी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की सरकारी मूंग आखिर मिट्टी में कैसे बदल गई? और इस पूरे खेल में किन-किन लोगों की मिलीभगत थी? आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

