उज्जैन। गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन में दिए गए बयान के बाद शुरू हुई चर्चाओं के बीच साध्वी हर्षानंद गिरि, जिन्हें हर्षा रिछारिया के नाम से भी जाना जाता है, ने अब इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि संन्यास लेने के बाद माता-पिता के साथ रहने को लेकर कुछ संत सवाल उठा रहे हैं, लेकिन जब तक उनका अपना आश्रम नहीं बन जाता, तब तक उनके पास रहने के लिए सिर्फ दो ही स्थान हैं—अपने गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर।
साध्वी हर्षानंद ने कहा कि वह अपने माता-पिता के घर इसलिए रहती हैं क्योंकि वहां खुद को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर समाज की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में यदि कोई संत सार्वजनिक रूप से उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का भरोसा देता है, तो वह उसी दिन अपना सामान लेकर उस आश्रम में रहने चली जाएंगी।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही उनका अपना आश्रम तैयार होगा, वह पूरी तरह वहीं रहकर संन्यासी जीवन का पालन करेंगी। फिलहाल स्थायी आश्रम नहीं होने की वजह से माता-पिता के साथ रहना ही उनके लिए सबसे सुरक्षित और उचित विकल्प है।
वीडियो में साध्वी हर्षानंद ने कुछ संतों की आलोचनाओं पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनकी हर बात पर आपत्ति जताना संतों के आचरण के अनुरूप नहीं है। संतों का स्वभाव प्रेम, धैर्य और सहनशीलता का होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनके रहने, पहनने, खाने या मिलने-जुलने पर हर बार आपत्ति की जाती है, तो यह उचित नहीं कहा जा सकता।
बता दें कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में मीडिया से बातचीत के दौरान साध्वी हर्षानंद ने महिलाओं की सुरक्षा और आश्रमों में रहने को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी। अब सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने अपने बयान को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी है।

