भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए प्रदेश को देश के उभरते ग्रीन एनर्जी हब के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश वर्ष 2030 तक भारत के 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है और राज्य तेजी से स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण तथा हरित औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सम्मेलन में पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली एयरपोर्ट से शिवाजी स्टेडियम तक एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो से सफर किया। उन्होंने इसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश बताया। दिल्ली मेट्रो में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा के उपयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
नई दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मध्य प्रदेश ने स्वच्छ और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया। सम्मेलन में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी, भूटान और श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री समेत देश-विदेश के कई विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में मध्य प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावॉट से बढ़कर 11 हजार मेगावॉट तक पहुंच गई है, यानी लगभग 25 गुना वृद्धि हुई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने नवकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बायोमास से जुड़ी नई नीतियां लागू कर निवेश और नवाचार को नई गति दी है।
उन्होंने रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 750 मेगावॉट की इस परियोजना ने पहली बार सौर ऊर्जा का टैरिफ कोयला आधारित बिजली से भी कम साबित किया। इस परियोजना को विश्व बैंक का प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिला और इसकी केस स्टडी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है। वहीं आगर-शाजापुर-नीमच की 1500 मेगावॉट सौर परियोजना में 2.14 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम टैरिफ हासिल हुआ है, जिससे भारतीय रेलवे को कई राज्यों में हरित ऊर्जा मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 278 मेगावॉट क्षमता की देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा चुका है। इसके अलावा सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना के तहत लगभग 14,900 मेगावॉट क्षमता के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें किसानों और एमएसएमई क्षेत्र की बड़ी भागीदारी देखने को मिली है।
ऊर्जा भंडारण को लेकर भी मुख्यमंत्री ने बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुरैना में 440 मेगावॉट सौर ऊर्जा और 880 मेगावॉट-घंटे की बैटरी स्टोरेज परियोजना विकसित की जा रही है, जो प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है। इसके साथ ही 4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे तक ऊर्जा भंडारण करने वाली नई परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है, जिससे उद्योगों और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रूफटॉप सोलर योजना के तहत 1300 सरकारी भवनों पर 48 मेगावॉट क्षमता विकसित की जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख घरों में 566 मेगावॉट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को वैश्विक मंचों पर निवेश-अनुकूल राज्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है और आने वाले वर्षों में प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगा।
सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश जल्द ही 300 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार करेगा और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को रूफटॉप सोलर का लाभ मिल रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश सहित सभी राज्यों से हरित ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील भी की।

