कागजों में बना तालाब, जमीन पर गायब! किसान बोला- मेरा तालाब आखिर चोरी कहां हो गया, अफसरों से खोजकर दिलाओ

टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की निगरानी और कागजी कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां सरकारी रिकॉर्ड में एक किसान के खेत पर तालाब बन चुका है, उसका मस्टर रोल भी दर्ज है और निर्माण के लिए 1 लाख 47 हजार 621 रुपये की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जब किसान अपने खेत पर पहुंचा तो वहां तालाब तो दूर, खुदाई तक का कोई निशान नहीं मिला।

पूरा मामला पलेरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत स्यावनी का बताया जा रहा है। यहां रहने वाले किसान चतुर कुशवाहा दिल्ली में मजदूरी करने गए हुए थे। जब वह वापस गांव लौटे तो जनपद पंचायत की जांच टीम उनके घर पहुंची और खेत में बने तालाब के बारे में जानकारी लेने लगी।

यह सुनकर किसान खुद हैरान रह गया, क्योंकि उसके खेत में कभी कोई तालाब बना ही नहीं था। किसान ने अधिकारियों से मानो यही सवाल कर दिया कि अगर रिकॉर्ड में तालाब बन चुका है, तो फिर उसका तालाब आखिर गया कहां? किसान ने अफसरों से अपना तालाब खोजकर दिलाने की गुहार तक लगा दी।

1 लाख 47 हजार की लागत, रिकॉर्ड में पूरा निर्माण

जांच के दौरान सामने आया कि 26 अप्रैल 2025 को चतुर कुशवाहा के नाम पर 1 लाख 47 हजार 621 रुपये की लागत से खेत तालाब स्वीकृत किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया और मस्टर रोल भी दर्ज बताए जा रहे हैं।

लेकिन जब अधिकारियों ने मौके पर जाकर देखा तो किसान के खेत में जमीन बिल्कुल खाली थी। यानी कागजों में तालाब मौजूद था, लेकिन जमीन पर उसका कोई अस्तित्व ही नहीं था।

मीडिया की खबर के बाद रात में जेसीबी पहुंची

मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद हड़कंप मच गया। आरोप है कि मामले को दबाने के लिए सरपंच और सचिव ने रात के अंधेरे में जेसीबी भेजकर तालाब की खुदाई शुरू करा दी।

लेकिन जल्दबाजी में हुई इस कथित कार्रवाई ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया। आरोप है कि खुदाई किसान चतुर कुशवाहा के खेत में करने के बजाय पड़ोसी किसान सीताराम पाल की जमीन पर कर दी गई।

अब सवाल यह है कि अगर तालाब पहले ही सरकारी रिकॉर्ड में बन चुका था, तो मौके पर उसकी खुदाई बाद में क्यों कराई गई और वह भी कथित तौर पर दूसरे किसान की जमीन पर?

जांच के आदेश, सामने आएगा पूरा सच

मामला सामने आने के बाद पलेरा जनपद पंचायत के सीईओ अरविंद कुमार बोरकर ने जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कराई जा रही है।

इस मामले ने ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जमीन पर तालाब बना ही नहीं था, तो फिर सरकारी रिकॉर्ड में निर्माण पूरा कैसे दिखाया गया, मस्टर रोल कैसे दर्ज हुआ और राशि से जुड़ी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी?

अब जांच के बाद ही साफ होगा कि इस पूरे मामले में गलती कहां हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। लेकिन फिलहाल मध्य प्रदेश में सामने आया यह ‘तालाब चोरी’ का मामला सरकारी कागजों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर की एक हैरान करने वाली तस्वीर जरूर दिखा रहा है।

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