भोपाल। स्वतंत्रता दिवस से पहले मध्य प्रदेश में निकाली जा रही तिरंगा यात्रा को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने तिरंगा यात्रा को भाजपा का महज इवेंट मैनेजमेंट बताया है, जबकि बीजेपी ने कांग्रेस के इस बयान पर पलटवार करते हुए इसे तिरंगे और देश के सम्मान से जोड़ दिया है।
कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना
पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने तिरंगा यात्रा को लेकर भाजपा और आरएसएस पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त को महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो और करो या मरो का आह्वान किया था। पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि उस दौर में आरएसएस और बीजेपी का कोई अस्तित्व नहीं था और लंबे समय तक नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया गया।
जनाधार खिसकने के डर से आयोजन का आरोप
पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है, इसलिए युवाओं को आकर्षित करने के लिए इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा के आयोजन में पूरी राज्य सरकार लगी हुई है, जबकि देशभक्ति का असली सम्मान तभी होगा जब प्रदेश के परेशान वर्गों की समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले नगरीय निकाय, पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जनता भाजपा को इसका जवाब देगी।
बीजेपी ने कहा- यह सोच बेहद शर्मनाक
कांग्रेस के बयान पर बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि देश की शान में निकाली जा रही तिरंगा यात्रा को सिर्फ इवेंट बताना बेहद शर्मनाक है। आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी सोच रखने वालों का भाव पाकिस्तानी है और वे भारत के दुश्मनों जैसी भाषा बोल रहे हैं।
बीजेपी ने तिरंगा यात्रा को शहीदों के सम्मान से जोड़ा
आशीष अग्रवाल ने कहा कि तिरंगा यात्रा देश के उन हजारों-लाखों वीर सैनिकों के बलिदान का सम्मान है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस इस तरह की बयानबाजी करके देश को बदनाम करने और राष्ट्रध्वज का अपमान करने का काम कर रही है।
अब तिरंगा यात्रा को लेकर दोनों दलों के बीच शुरू हुई यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज होती है या नहीं, यह देखना होगा। फिलहाल स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगा यात्रा देशभक्ति के आयोजन से ज्यादा मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का नया मुद्दा जरूर बन गई है।

