भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 18 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और जनकल्याण से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में नर्मदा नदी के संरक्षण से लेकर महिलाओं, बेटियों, किसानों, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और सड़क विकास तक कई योजनाओं के लिए बड़ी राशि स्वीकृत की गई है।
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और दीर्घकालीन सतत प्रबंधन के लिए ‘निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन’, यानी ‘नमन मिशन’ के गठन को मंजूरी दी है। प्रदेश की करीब 33 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में इस मिशन को एकीकृत, वैज्ञानिक और बहु-विभागीय व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाएगा।
नमन मिशन एक स्वायत्त संस्था के रूप में काम करेगा और इसमें नदी विज्ञान, जल विज्ञान, पर्यावरण, जैव विविधता और सामुदायिक प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। मिशन की सर्वोच्च साधारण सभा की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे, जबकि मुख्य सचिव प्रशासनिक कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष होंगे। मिशन में आईआईएसईआर, आईआईटी, आईआरएमए, एनआईएच, आईआईएफएम, आईसीएआर और एनईईआरआई जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा।
नर्मदा संरक्षण के लिए मिशन का वित्तीय ढांचा भी मजबूत किया गया है। ‘निर्मल एवं अविरल नर्मदा मिशन निधि’ के तहत राज्य अनुदान से हर साल 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा वन विभाग की कैम्पा निधि से भी हर साल 100 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पांच वर्षों में राज्य बजट से 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही सीएसआर, केंद्रीय सहायता और पीपीपी मॉडल के जरिए भी संसाधन जुटाए जाएंगे।
नर्मदा नदी के स्वास्थ्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट यानी पीएमयू बनाई जाएगी। यह यूनिट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करेगी।
महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं को भी कैबिनेट ने बड़ी प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 2 हजार 137 करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना के तहत पहली बार मां बनने वाली पात्र महिला को कुल 5 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। वहीं दूसरे प्रसव पर बेटी के जन्म की स्थिति में 6 हजार रुपये की सहायता एक किश्त में देने का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को भी अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए कैबिनेट ने 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता डीबीटी के जरिए दी जा रही है। फिलहाल प्रदेश में करीब 1 करोड़ 27 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं।
वहीं, मध्य प्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए भी 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 16 हजार 326 करोड़ 47 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का उद्देश्य बेटियों के जन्म के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ाना, लिंगानुपात में सुधार करना और बालिकाओं की शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। अब तक करीब 50 लाख 99 हजार बालिकाएं इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं।
लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत कक्षा छठवीं में प्रवेश पर 2 हजार रुपये, नौवीं में प्रवेश पर 4 हजार रुपये, 11वीं और 12वीं में प्रवेश पर 6-6 हजार रुपये दिए जाते हैं। कॉलेज में प्रवेश के बाद प्रथम और अंतिम वर्ष में 12 हजार 500-12 हजार 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर पात्र हितग्राही को 1 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है।
किसानों और कृषि शिक्षा को लेकर भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। कृषि विभाग की तीन योजनाओं को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए कुल 870 करोड़ 16 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर की स्ववित्तीय पेंशन योजना के लिए 310 करोड़ 23 लाख रुपये, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर की ब्लॉक ग्रांट योजना के लिए 469 करोड़ 93 लाख रुपये और कृषि क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के लिए 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी कैबिनेट ने कुल 11 हजार 835 करोड़ 35 लाख रुपये की बड़ी राशि मंजूर की है। इसमें उप स्वास्थ्य केंद्र योजना के लिए 4 हजार 742 करोड़ 45 लाख रुपये, स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन और सुदृढ़ीकरण के लिए 518 करोड़ 93 लाख रुपये, अस्पताल और औषधालय भवन निर्माण के लिए 3 हजार 219 करोड़ 22 लाख रुपये और आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने के लिए 3 हजार 354 करोड़ 75 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
प्रदेश में करीब 71 हजार आशा कार्यकर्ता और 5 हजार 200 आशा पर्यवेक्षक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं। आशा कार्यकर्ता गांव और शहरों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, मलेरिया, टीबी और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम की पदीय संरचना में 35 नए पदों को भी मंजूरी दी गई है। इसके अलावा पहले से स्वीकृत 7 पदों की निरंतरता अगले पांच वर्षों तक यानी 18 सितंबर 2031 तक रखी जाएगी। इससे करीब 4 करोड़ 12 लाख रुपये का वार्षिक वित्तीय भार आने का अनुमान है, जिसकी पूर्ति निगम अपने स्रोतों से करेगा।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी 734 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें अनुसंधान और विकास गतिविधियों के लिए 201 करोड़ 28 लाख रुपये तथा निर्देशन और प्रशासन से जुड़ी गतिविधियों के लिए 119 करोड़ 4 लाख रुपये शामिल हैं।
इन योजनाओं के जरिए रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, जैव प्रौद्योगिकी, पेटेंट सूचना, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, ग्रामीण तकनीक और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में काम को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके अलावा विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने और विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 172 करोड़ 52 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाएं, विज्ञान शिक्षा और नवाचार कार्यशालाएं, विज्ञान मेले और विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम की गतिविधियों के लिए भी 241 करोड़ 16 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट बैठक में महिला सशक्तिकरण, बेटियों की शिक्षा, नर्मदा संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य, सड़क, विज्ञान और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं। इन फैसलों को अगले पांच वर्षों के विकास और जनकल्याण के रोडमैप के तौर पर देखा जा रहा है।

