भोपाल। मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बावजूद नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। करीब 15 दिनों से अभ्यर्थी लोक शिक्षण संचालनालय के बाहर धरने पर बैठे हैं और नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। मंगलवार रात लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह खुद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और गेट के सामने जमीन पर बैठकर अभ्यर्थियों से बातचीत की।
जमीन पर बैठकर आयुक्त ने सुनी अभ्यर्थियों की बात
रात करीब साढ़े 8 बजे आयुक्त अभिषेक सिंह ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से एक-एक करके उनकी समस्याएं सुनीं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिल रही है।
बताया जा रहा है कि करीब एक हजार अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन आवेदन की अंतिम तिथि तक उनकी डीएलएड की डिग्री पूरी नहीं हुई थी। इसी वजह से उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
मामला हाईकोर्ट में, आयुक्त बोले- नियमों के मुताबिक ही होगी कार्रवाई
नियुक्ति से बाहर किए गए कुछ अभ्यर्थियों ने मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। आयुक्त अभिषेक सिंह ने अभ्यर्थियों से कहा कि फिलहाल मामला अदालत में है और विभाग नियमों के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई कर सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर अदालत का फैसला अभ्यर्थियों के पक्ष में आता है, तो उसके आधार पर उन्हें सेवा में लेने की प्रक्रिया की जाएगी।
बारिश में धरना दे रहे अभ्यर्थियों से घर लौटने की अपील
बारिश के मौसम को देखते हुए आयुक्त ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं और खासकर छात्राओं से रात के समय खुले में नहीं रुकने की अपील की। उन्होंने अभ्यर्थियों को घर लौटने की समझाइश भी दी।
13 हजार से ज्यादा पदों पर हुई थी शिक्षक भर्ती परीक्षा
अभ्यर्थियों के मुताबिक वर्ष 2025 में कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के 13 हजार 89 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। आवेदन के दौरान यह प्रावधान बताया गया था कि परिणाम जारी होने तक अभ्यर्थियों के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी होनी चाहिए।
हालांकि, अंतिम परिणाम जारी होने के बाद चयन अधिकारियों की ओर से शैक्षणिक योग्यता के लिए 25 अगस्त 2025 की कटऑफ डेट निर्धारित की गई। इसी कटऑफ के कारण कई ऐसे अभ्यर्थी नियुक्ति से बाहर हो गए, जिन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल की थी।
अब इन अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट के फैसले पर है और उनका कहना है कि चयनित होने के बावजूद नौकरी से वंचित रहना उनके लिए बेहद निराशाजनक है।

