नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से सरकारी दावों की हकीकत दिखाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां बारिश ने गांवों के कच्चे रास्तों को दलदल में बदल दिया है और हालात ऐसे हैं कि स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ रहा है। परेशान होकर कुछ बच्चे अपनी स्कूल यूनिफॉर्म में ही कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए और प्रशासन से रास्ता ठीक कराने की गुहार लगाई।
तीन किलोमीटर का रास्ता बना दलदल, यूनिफॉर्म में कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे
रम्पुरा से केरपानी के बीच करीब तीन किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता बारिश के बाद पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। रोजाना इसी रास्ते से स्कूल जाने वाले बच्चे फिसलने और गिरने के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं। कपड़े खराब होने और हादसों के डर से परेशान छात्र-छात्राएं अपनी यूनिफॉर्म में ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
बच्चों का कहना है कि बारिश के मौसम में रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्हें डर रहता है कि रास्ते में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
8 किलोमीटर लंबे हाईवे का डर, फिर भी दलदल से गुजरने को मजबूर
दूसरी तस्वीर करेली जनपद पंचायत क्षेत्र के सुआतला और अमथनू गांव के बीच की है। यहां करीब ढाई किलोमीटर लंबी सड़क लंबे समय से पक्की होने का इंतजार कर रही है। यह रास्ता करीब 7 से 8 गांवों को जोड़ता है, लेकिन बारिश के दौरान यहां चलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के सामने दूसरा विकल्प करीब 8 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे है। लेकिन हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के चलते बच्चों और ग्रामीणों को हादसे का डर रहता है। ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर कीचड़ और दलदल वाले रास्ते से ही आने-जाने को मजबूर हैं।
बच्चों की परेशानी पर प्रशासन ने दिया आश्वासन
मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत CEO गजेंद्र सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारियों ने समस्या का संज्ञान लिया है। अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई कर रास्ते की समस्या दूर करने का आश्वासन दिया है।
लेकिन सवाल यही है कि जब तक पक्की सड़क नहीं बनती, तब तक बारिश के इस मौसम में बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कब होगी? क्योंकि इन बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचने का रास्ता सिर्फ कीचड़ से भरा नहीं है, बल्कि हर कदम पर खतरे से भरा हुआ है।

