उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पास एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिली है। बेगम बाग क्षेत्र में प्रशासन ने करीब 15 अवैध बिल्डिंगों को जमींदोज कर दिया। इन बिल्डिंगों में चिकन सेंटर, होटल और रेस्टोरेंट समेत कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर यह निर्माण हुआ था, वह उज्जैन विकास प्राधिकरण की है और इसे करीब 30 साल की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था। लेकिन भूखंड धारकों ने नियमों के विपरीत इनका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया।
लीज की अवधि खत्म होने के बाद इसका नवीनीकरण भी नहीं हो सका। इसके बाद उज्जैन विकास प्राधिकरण की ओर से लगातार नोटिस जारी किए गए। मामला न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद अब प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
शनिवार सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान किसी तरह का विरोध प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में बुलडोजर लगातार अवैध निर्माणों को हटाने में जुटा रहा।
यह इलाका महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर स्थित है और संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। कार्रवाई को देखते हुए श्रद्धालुओं और वाहनों के लिए इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। लोगों को आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
दरअसल, इसी इलाके में पिछले करीब एक साल के दौरान सात चरणों में 72 बिल्डिंगों को पहले ही जमींदोज किया जा चुका है। उस समय कार्रवाई का विरोध भी देखने को मिला था, लेकिन इस बार कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है।
अब पूरे मामले को समझिए।
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने साल 1985 में बेगम बाग क्षेत्र में 48 भूखंड आवासीय उपयोग के लिए 30 साल की लीज पर आवंटित किए थे। इन सभी भूखंडों का आकार करीब 2400 स्क्वायर फीट बताया जा रहा है।
आरोप है कि भूखंड धारकों ने आवासीय उपयोग के बजाय इन जमीनों का व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया और बाद में भूखंडों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर बड़ी संख्या में निर्माण कर लिए।
साल 2014-15 के आसपास इन भूखंडों की लीज अवधि भी समाप्त हो गई। इसके बाद उज्जैन विकास प्राधिकरण ने भूखंड धारकों को कई नोटिस जारी किए और साल 2023-24 में लीज समाप्त करने की कार्रवाई की गई।
इसके खिलाफ भूखंड धारक न्यायालय पहुंचे। अलग-अलग मामलों में उन्हें न्यायालय से स्टे भी मिला और मामला अलग-अलग अदालतों में चलता रहा। लेकिन अब न्यायालय से स्टे हटने के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, इन 48 मूल भूखंडों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर कुल 106 बिल्डिंगों का निर्माण कर लिया गया था। इनमें से अब तक 86 बिल्डिंगों को जमींदोज किया जा चुका है, जबकि बाकी बची 20 बिल्डिंगों पर भी कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आज की कार्रवाई में जिन संपत्तियों को हटाया जा रहा है, उनके कब्जेदारों में शकिला बी, मेहरूनिशा, इरशाद, बाब मलंग शाह, नजमा बी, फरीजा बी, जावेद खान, शमीम बी, अफसाना बी, मोहम्मद रईस खान, इशरत जहां, डॉ. महबूब खान, हफीजुरहमान, जाकिर भाई और मोहम्मद सब्बीर के नाम बताए गए हैं।
उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप कुमार सोनी के मुताबिक, न्यायालय से स्टे खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि भूखंड आवासीय उपयोग के लिए दिए गए थे, लेकिन उनका व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया। साथ ही लीज समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण भी नहीं हुआ।
एक और अहम बात यह है कि जिस इलाके में यह कार्रवाई की जा रही है, वहां आगामी सिंहस्थ 2028 को देखते हुए ब्रिज निर्माण का प्रस्ताव भी है। ऐसे में प्रशासन की इस कार्रवाई को आने वाले समय में महाकाल मंदिर क्षेत्र के विकास और यातायात व्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई जारी है और बाकी बचे अवैध निर्माणों पर भी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

