किताबों का बोझ और उफनती नदी का डर! जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते मासूम

 विदिशा (शमशाबाद)। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोलती तस्वीरें सामने आई हैं। लटेरी तहसील के ग्राम पंचायत धीरगढ़ के अंतर्गत आने वाले भीलाखेड़ी खुर्द गांव में मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।

इन बच्चों की पीठ पर किताबों का बोझ है, लेकिन स्कूल तक पहुंचने का रास्ता उससे भी ज्यादा खतरनाक है। गांव के बच्चों को उफनती नदी पार करके स्कूल जाना पड़ता है। तेज बहाव और मटमैले पानी के बीच से गुजरते हुए ये बच्चे कभी पैदल तो कभी तैरकर नदी पार करते हैं।

सोचिए, जिन हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिएं, उन्हीं बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए पानी के तेज बहाव से जूझना पड़ रहा है। नदी पार करते समय अगर किसी बच्चे का पैर फिसल जाए या तेज बहाव उसे अपने साथ बहा ले जाए, तो नतीजा कितना भयावह हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर विदिशा के हालात कब सुधरेंगे?

विदिशा जिले में बदहाल रास्तों और जान जोखिम में डालकर सफर करने की तस्वीरें पहले भी सामने आती रही हैं। पलोह डैम से लोगों के जान जोखिम में डालकर गुजरने के वीडियो सामने आए थे।

इसके बाद नटेरन के संदीपनी स्कूल से ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिनमें मासूम बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर स्कूल ले जाते हुए देखा गया था। अब धीरगढ़ के भीलाखेड़ी खुर्द से उफनती नदी पार करते बच्चों का वीडियो सामने आया है।

इन तस्वीरों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस दिन मासूम बच्चे उफनती नदी पार करके स्कूल जाने को मजबूर थे, उसी दौरान संभाग आयुक्त विदिशा जिले के स्कूलों का निरीक्षण कर रहे थे।

यानी एक तरफ अधिकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे और दूसरी तरफ कुछ किलोमीटर दूर बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे।

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर साल नदी उफान पर आ जाती है। पानी बढ़ने के बाद बच्चों और ग्रामीणों के लिए इसे पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद लंबे समय से यहां पुल की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका।

अब सवाल सिर्फ एक पुल का नहीं है। सवाल उन मासूम बच्चों की सुरक्षा का है, जिन्हें पढ़ने के लिए हर दिन मौत के इस रास्ते से गुजरना पड़ रहा है।

सरकार और प्रशासन शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन विदिशा के भीलाखेड़ी खुर्द की ये तस्वीरें उन दावों की जमीनी हकीकत जरूर दिखा रही हैं।

जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और बारिश के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल व्यवस्था करे, ताकि किताबों का बोझ उठाने वाले इन मासूमों को स्कूल जाने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।

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