बीमारी से जूझ रहे बैगा परिवारों के बीच पहुंचे CM मोहन, मृत बच्चों के परिजनों को 2-2 लाख की मदद का ऐलान, बहनों से बंधवाई राखी

बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी अंचल से एक भावुक तस्वीर सामने आई है। बीमारी से प्रभावित बैगा परिवारों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद पहुंचे और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। इस दौरान बैगा बहनों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी और मुख्यमंत्री ने भी उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को बैहर विधानसभा क्षेत्र के बीमारी प्रभावित ग्राम कोरका-बोंदारी पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सीधे संवाद किया और क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार, मूलभूत जरूरतों और सरकारी योजनाओं को लेकर जानकारी ली।

बताया जा रहा है कि बैगा बहुल गांवों में पिछले करीब ढाई महीने से बीमारी का प्रकोप है। इस दौरान चार हजार से ज्यादा लोग प्रभावित होने की बात सामने आई है और करीब 25 बच्चों की मौत की जानकारी भी सामने आई है। कई बच्चे अभी भी बीमार बताए जा रहे हैं।

इसी बीच मुख्यमंत्री ने बीमारी से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और मृत बच्चों के परिजनों के लिए बड़ी सहायता की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान रक्षाबंधन का भावुक रंग भी देखने को मिला। बैगा बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने बहनों से राखी बंधवाकर उनका आशीर्वाद लिया और उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा है। नक्सलवाद के कारण यहां कई जरूरी सुविधाएं पूरी तरह नहीं पहुंच पाईं। अब क्षेत्र नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुका है, इसलिए सरकार का फोकस यहां बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को मजबूत करने पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में पूरी गंभीरता के साथ काम करेगी और कोशिश होगी कि विकास की मुख्यधारा से हर परिवार को जोड़ा जाए। उन्होंने साफ कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे।

बीमारी से जूझ रहे बैगा परिवारों के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी और मृत बच्चों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता के ऐलान ने इस दौरे को बेहद अहम बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीमारी की असली वजह क्या है और प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को कितनी तेजी से मजबूत किया जाता है।

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