भोपाल। मध्य प्रदेश में TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर सियासत फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर बड़ा कदम उठाने की मांग की है। सिंघार का कहना है कि तमिलनाडु की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी TET को लेकर फैसला किया जाए और इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए।
दरअसल, प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को लेकर सेवा निरंतरता, पदोन्नति और दूसरे सेवा लाभों का मुद्दा सामने आया है। उमंग सिंघार ने अपने पत्र में दावा किया है कि इस स्थिति से करीब डेढ़ लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
सिंघार ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के फैसलों का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि TET से जुड़ा विषय फिलहाल बेहद महत्वपूर्ण है और शिक्षकों के हितों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार को गंभीरता से फैसला लेना चाहिए।
अपने पत्र में उमंग सिंघार ने तमिलनाडु विधानसभा के हालिया फैसले का उदाहरण दिया है। उनके मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा ने 25 अगस्त 2026 को 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने और उनके सेवा एवं पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण का प्रस्ताव पारित किया है।
इसी फैसले की तर्ज पर नेता प्रतिपक्ष ने मध्य प्रदेश में भी शिक्षकों के हित में कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र जल्द बुलाया जाए और TET की अनिवार्यता से जुड़े इस पूरे मामले पर निर्णय लिया जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या मध्य प्रदेश सरकार तमिलनाडु की तर्ज पर TET को लेकर कोई राहत देने वाला फैसला करेगी? क्या करीब डेढ़ लाख शिक्षकों से जुड़े इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा?
फिलहाल, उमंग सिंघार की इस मांग के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा का मुद्दा एक बार फिर मध्य प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गया है और अब नजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सरकार के अगले कदम पर है।

