भोपाल। मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जिन सरकारी स्कूलों के पास अभी अपना पक्का भवन नहीं है, उन्हें जल्द ही सर्वसुविधायुक्त पक्के भवन उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह बात प्रदेश के नव-नियुक्त युवा जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के साथ सीधे संवाद के दौरान कही।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में औसतन 28 वर्ष की आयु के करीब 123 युवा अधिकारियों को मैदानी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की कमान सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा, नई सोच और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक बड़ा लक्ष्य भी दिया। उन्होंने कहा कि हर जिले के बोर्ड परीक्षा परिणाम को 90 प्रतिशत से ज्यादा पहुंचाने के संकल्प के साथ काम किया जाए। इसके लिए सिर्फ अच्छे प्रदर्शन करने वाले बच्चों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए अलग रणनीति तैयार करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक तकनीक ने विद्यार्थियों के सीखने के नए रास्ते खोल दिए हैं। ऐसे में इन तकनीकों का इस्तेमाल शिक्षा को बेहतर और प्रभावी बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। अगर कोई विद्यार्थी नियमित रूप से स्कूल नहीं आ पा रहा है तो उसे ओपन स्कूल जैसे वैकल्पिक माध्यमों से शिक्षा से जोड़ा जाए।
शिक्षकों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यापन को सिर्फ नौकरी न समझें, बल्कि इसे समाज निर्माण का अवसर मानें। शिक्षक बच्चों की रुचि, उनकी प्रतिभा और पारिवारिक परिस्थितियों को समझकर उन्हें सही करियर विकल्प की जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ने सरकारी योजनाओं का लाभ भी हर बच्चे तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने मुफ्त साइकिल, बस सुविधा, गणवेश और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम छात्र तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही स्कूलों के विकास में जनभागीदारी बढ़ाने और शिक्षकों को स्वस्थ रहने के लिए अपनी दिनचर्या में योग और प्राणायाम शामिल करने की सलाह दी। मुख्यमंत्री का संदेश साफ है कि मजबूत स्कूल भवन, बेहतर तकनीक, जिम्मेदार शिक्षक और 90 प्रतिशत से ज्यादा परीक्षा परिणाम के लक्ष्य के साथ मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी है।

