जनसुनवाई में आम और खास के बीच बड़ा अंतर! भाजपा जिलाध्यक्ष के पहुंचते ही कलेक्टर ने छोड़ी कुर्सी, कतार में इंतजार करते रहे फरियादी

 शिवपुरी। शिवपुरी कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने आम और खास के बीच व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए। अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे आम लोग कतार में खड़े होकर कलेक्टर से मिलने का इंतजार कर रहे थे, तभी भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव वहां पहुंचे। उनके पहुंचते ही कलेक्टर अपनी कुर्सी से उठे और उन्हें अपने केबिन के अंदर लेकर चले गए।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जनसुनवाई में बड़ी संख्या में फरियादी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष के पहुंचते ही कलेक्टर उन्हें लेकर केबिन की ओर चले जाते हैं। बाहर खड़े लोग अपनी बारी का इंतजार करते रह जाते हैं।

बताया जा रहा है कि भाजपा जिलाध्यक्ष भी किसी जनसमस्या से जुड़े मामले को लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे। हालांकि, उनके लिए अलग से बातचीत की व्यवस्था क्यों की गई और कलेक्टर को अपनी कुर्सी छोड़कर उन्हें केबिन तक ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी, इसको लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

कुछ देर बाद कलेक्टर वापस जनसुनवाई में पहुंचे और फरियादियों की समस्याएं सुनना शुरू कर दिया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने जनसुनवाई की व्यवस्था और आम लोगों के साथ होने वाले व्यवहार पर बहस छेड़ दी है।

सवाल यही है कि जनसुनवाई आखिर किसके लिए होती है? उन आम लोगों के लिए, जो अपनी शिकायत लेकर घंटों कतार में खड़े रहते हैं, या फिर प्रभावशाली लोगों के लिए, जिनके पहुंचते ही व्यवस्था बदल जाती है? अगर जनसुनवाई में भी आम और खास के लिए अलग-अलग प्राथमिकता दिखाई दे, तो फिर उस व्यवस्था में आम आदमी की फरियाद की अहमियत कितनी रह जाती है?

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