ग्वालियर। सिंधिया राजपरिवार की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को लेकर चल रहे पुराने विवाद में अब एक और बड़ा मोड़ आ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की फुफेरी बहन प्रतिमा देवी भी अब इस कानूनी मामले में पक्षकार बन गई हैं। एडीजे कोर्ट ने प्रतिमा देवी की याचिका स्वीकार कर ली है और साफ कर दिया है कि उनका पक्ष सुने बिना संपत्ति समझौते से जुड़ी अर्जी पर कोई फैसला नहीं किया जाएगा।
दरअसल, सिंधिया राजपरिवार की संपत्तियों को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। अब बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी भी इस मामले में सामने आ गई हैं।
प्रतिमा देवी ने कोर्ट में मांग की थी कि ऊषा राजे की ओर से संपत्ति समझौते को लेकर पेश की गई अर्जी पर फैसला करने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए। उनका कहना है कि उनकी मां के हिस्से से जुड़े अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए। प्रतिमा देवी इससे पहले कथित संपत्ति समझौते और उसमें अपनी सहमति बताए जाने को लेकर भी आपत्ति दर्ज करा चुकी हैं।
एडीजे कोर्ट ने उनकी याचिका मंजूर करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिमा देवी को सुने बिना ऊषा राजे की अर्जी का निराकरण नहीं किया जाएगा। यानी अब संपत्ति विवाद में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
हालांकि, परिवार की ओर से कोर्ट में अलग दावा किया गया है। परिवार की तरफ से कहा गया है कि प्रतिमा देवी को समझौते की जानकारी थी और उन्होंने अपनी सहमति के साथ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए थे। इसके समर्थन में पुराने दस्तावेज और पारिवारिक तस्वीरें भी कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनवाई के दौरान मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि अगली सुनवाई में प्रतिमा देवी के दावे और परिवार की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों पर कोर्ट का रुख क्या रहता है और करीब 40 हजार करोड़ की संपत्तियों से जुड़े इस पुराने विवाद की दिशा आगे किस तरफ जाती है।

