मास्टर प्लान और ट्रैफिक पर जीतू पटवारी की चेतावनी! 3 महीने में सुधार नहीं हुआ तो 50 हजार इंदौरियों के साथ भोपाल कूच

इंदौर। इंदौर में बदहाल ट्रैफिक, ऊबड़-खाबड़ सड़कों और लंबे समय से अटके मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से चर्चा के दौरान पटवारी ने सरकार पर झूठे वादों के सहारे इंदौर में नौ विधायक, सांसद और महापौर जिताने का आरोप लगाया और अब सीधे आंदोलन की चेतावनी दे दी है।

जीतू पटवारी ने कहा है कि अगर अगले तीन महीने में इंदौर का मास्टर प्लान लागू नहीं किया गया और शहर की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो वे 50 हजार इंदौरियों के साथ भोपाल कूच करेंगे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं, बल्कि इंदौर की जनता के हितों की लड़ाई होगी।

पटवारी ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का भी गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि वर्षों से चले आ रहे इस कथित संरक्षण का खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शहर की यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि सड़कों पर वाहन रेंगने को मजबूर हैं और लंबे जाम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुके हैं।

ट्रैफिक जाम के कारण हुई मौतों का मुद्दा उठाते हुए पटवारी ने सवाल किया कि अगर शहर की व्यवस्था इतनी खराब है कि लोगों की जान तक जा रही है, तो आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने ‘उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन’ नामकरण पर भी आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित बताया।

मास्टर प्लान को लेकर पटवारी ने कहा कि इंदौर की आबादी लगातार बढ़ रही है और शहर की जरूरतें भी बदल रही हैं, लेकिन लंबे समय से मास्टर प्लान का इंतजार किया जा रहा है। उनका कहना है कि शहर के सुनियोजित विकास, ट्रैफिक व्यवस्था और बढ़ती आबादी की समस्याओं के समाधान के लिए मास्टर प्लान बेहद जरूरी है।

अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को तीन महीने का समय देने की बात कही है। अगर इस अवधि में मास्टर प्लान और शहर की व्यवस्थाओं को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कांग्रेस जनता को साथ लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी करेगी। ऐसे में अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार तीन महीने के भीतर इंदौर की इन समस्याओं पर कोई ठोस फैसला लेगी, या फिर 50 हजार इंदौरियों के साथ जीतू पटवारी का भोपाल कूच प्रदेश की सियासत को गर्माएगा?

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