गणेश चतुर्थी पर चिंतामण गणेश मंदिर में आस्था का सैलाब! एक प्रतिमा में तीन स्वरूपों के दर्शन, 1.25 लाख लड्डुओं का भोग

उज्जैन। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर उज्जैन के प्राचीन चिंतामण गणेश मंदिर में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और दूर-दूर से भक्त भगवान चिंतामण गणेश के दर्शन करने पहुंचे। कोई फूल और दुर्वा लेकर पहुंचा, तो कोई प्रसाद चढ़ाकर भगवान का आशीर्वाद लेने पहुंचा। वहीं कई श्रद्धालु अपने घर में स्थापना के लिए गणेश प्रतिमाएं लेकर भी मंदिर पहुंचे।

चिंतामण गणेश मंदिर की सबसे खास मान्यता यह है कि यहां एक ही प्रतिमा में भगवान गणेश के तीन स्वरूपों के दर्शन होते हैं। मान्यता के अनुसार चिंतामण गणेश भक्तों की चिंता दूर करते हैं, सिद्धिविनायक कार्यों को सिद्ध करने वाले हैं और इच्छामन गणेश भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मंदिर के पुजारी गणेश गुरु के मुताबिक, इस प्राचीन मंदिर का संबंध रामायण काल से भी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने यहां भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की थी। इसके बाद से ही भगवान गणेश यहां चिंतामण गणेश के नाम से प्रसिद्ध हुए। यही वजह है कि इस मंदिर में दर्शन के लिए सालभर श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहती है, लेकिन गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां भक्तों की भीड़ और भी बढ़ जाती है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में सुबह भगवान का विशेष अभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत पूजन और भव्य श्रृंगार हुआ। पूजा-अर्चना के बाद भगवान चिंतामण गणेश को एक लाख 25 हजार यानी सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डुओं का वितरण भी किया जाएगा।

इस खास पर्व पर सिर्फ उज्जैन ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने पहुंचे। उत्तर प्रदेश के साथ ही पुणे और हैदराबाद से आए भक्तों ने भी चिंतामण गणेश के दर्शन किए और भगवान से सुख-समृद्धि और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।

गणेश चतुर्थी के मौके पर पूरा चिंतामण गणेश मंदिर गणपति भक्ति में डूबा नजर आया। मंदिर परिसर में जयकारों और श्रद्धालुओं की भीड़ से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। आने वाले दिनों में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है और गणेश उत्सव के साथ चिंतामण गणेश की नगरी में आस्था का यह सिलसिला अनंत चतुर्दशी तक जारी रहने वाला है।

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