ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर क्राइम विंग ने एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड और सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। शहर के पॉश इलाके विंडसर हिल्स में एक किराए के डुप्लेक्स को ही ऑफिस बनाकर ऑनलाइन सट्टा, गैम्बलिंग और बैंक खातों की खरीद-फरोख्त का खेल चलाया जा रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों के तार दुबई और श्रीलंका तक जुड़े होने के सुराग मिले हैं।
दरअसल साइबर क्राइम विंग को विंडसर हिल्स स्थित एक डुप्लेक्स में संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने वहां दबिश दी और डुप्लेक्स से पांच युवकों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि सभी आरोपी एक साथ किराए के मकान में रह रहे थे और इसी जगह को अपना ऑफिस बनाकर पूरा नेटवर्क चला रहे थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, 3 लैपटॉप और 6 बैंक पासबुक समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इन सामानों की जांच से नेटवर्क के बारे में कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
एएसपी सुजावल जग्गा के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी हर महीने करीब 7 से 8 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन करते थे। इस हिसाब से सालभर में यह कारोबार करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंचने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार आरोपी ‘100 पैनल’ नाम की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन सट्टा खिलाने का काम कर रहे थे। इसके साथ ही बैंक खातों की खरीद-फरोख्त और ऑनलाइन गैम्बलिंग के जरिए भी नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में चार ग्वालियर और एक दतिया जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। सभी की उम्र करीब 28 साल है। शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला है कि जल्दी पैसा कमाने की चाह में इन युवकों ने मिलकर यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया था।
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई बैंक खातों से जुड़ी जानकारी भी मिली है। अब इन खातों का विवरण संबंधित बैंकों से जुटाया जा रहा है। इसके अलावा जब्त किए गए मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। पुलिस बैंकिंग डाटा और तकनीकी जांच के आधार पर साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन सट्टे और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की पहचान करने में जुटी है।
जांच का दायरा अब अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन तक भी पहुंच गया है। दुबई और श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के सुराग मिलने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस ऑनलाइन सट्टा और बैंक खातों के नेटवर्क का संचालन किस स्तर तक फैला हुआ था। वहीं, जिस व्यक्ति ने डुप्लेक्स किराए पर दिया था, उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, लेकिन जांच में जिस तरह करीब 100 करोड़ रुपए के सालाना ट्रांजेक्शन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के सुराग सामने आए हैं, उससे साफ है कि यह मामला सिर्फ पांच आरोपियों तक सीमित नहीं हो सकता। अब बड़ा सवाल यही है कि इस नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग हैं और दुबई-श्रीलंका से जुड़े तार आखिर किस बड़े साइबर नेटवर्क तक पहुंचते हैं।

