सांवेर में जर्जर दीवार बनी मौत का कारण! 4 महिला मजदूरों की मौत, परिजनों को 2-2 लाख की मदद और बच्चों की मुफ्त शिक्षा का ऐलान

इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के सांवेर में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। टशन चौराहे के पास करीब 40 साल पुराने जर्जर मकान को तोड़ने के दौरान अचानक पास की पुरानी दीवार भरभराकर गिर गई। दीवार की चपेट में वहां मजदूरी कर रहीं कई महिलाएं और अन्य लोग दब गए। हादसे में चार महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

बताया जा रहा है कि यहां ‘नेताजी’ के नाम से पहचाने जाने वाले पुराने और जर्जर मकान को डिस्मेंटल किया जा रहा था। इसी दौरान पास के मकान की पुरानी दीवार अचानक नीचे आ गिरी। दीवार के मलबे में मजदूरी कर रहे कई लोग दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी समेत अन्य संसाधनों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

शुरुआत में मलबे में एक बच्चे के दबे होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन मजदूरों से पूछताछ और रेस्क्यू के बाद स्पष्ट हुआ कि कोई बच्चा मलबे में नहीं दबा था। हालांकि, इस हादसे में चार महिलाओं की जान चली गई। मृतकों की पहचान रीना, सीमा बाई, चंदा बाई और सुशीला बाई के रूप में हुई है।

हादसे में मंजू बाई, सुंदर बाई, सुनील और दिलीप को इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि संतोषी बाई का इलाज सांवेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। हादसे की जानकारी मिलते ही मंत्री तुलसी सिलावट एमवाय अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज की जानकारी ली। इसके बाद मंत्री घटनास्थल पर भी पहुंचे।

वहीं पुलिस के अनुसार जर्जर मकान को तोड़ने का काम मकान मालिक के निर्देश पर कराया जा रहा था और मकान मालिक इंदौर में रहते हैं। पुलिस ने मलबा पूरी तरह साफ करा लिया है। अब जांच इस बात की जा रही है कि डिमोलेशन के दौरान जरूरी सुरक्षा और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। लापरवाही किस स्तर पर हुई, इसे लेकर संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री की ओर से चारों मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही घायलों का निशुल्क इलाज कराने और मृतकों के परिवारों के बच्चों की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त कराने की बात कही गई है। मंत्री तुलसी सिलावट ने मामले की उच्चाधिकारी स्तर पर निष्पक्ष जांच के निर्देश भी दिए हैं।

अब बड़ा सवाल यही है कि जर्जर मकान को तोड़ने के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए गए थे या नहीं और आखिर वह दीवार मजदूरों पर ही क्यों गिरी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही हादसे में लापरवाही की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।

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