इंदौर। कांग्रेस के भारत जोड़ो अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस वक्त अव्यवस्थाओं की तस्वीर सामने आई, जब पत्रकारों से संवाद करने पहुंचे कांग्रेस के बड़े नेताओं की आवाज ही ठीक से मीडिया तक नहीं पहुंच पाई। कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, अरुण यादव समेत कई नेता मौजूद थे, लेकिन प्रेस वार्ता से ज्यादा कार्यकर्ताओं की भीड़ नजर आई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेताओं को कार्यकर्ताओं ने चारों तरफ से घेर रखा था। ऐसे में पत्रकारों से सीधा संवाद करने के बजाय पूरा माहौल कार्यकर्ताओं के संबोधन जैसा दिखाई देने लगा। स्थिति यह रही कि कई पत्रकारों को नेताओं की बातें ठीक से सुनाई तक नहीं दे रही थीं। माइक और स्पीकर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को ऊंची आवाज में, लगभग चिल्लाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करना पड़ा। पत्रकारों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए उन्हें लगातार जोर लगाकर बोलना पड़ा।
कुछ देर बाद माइक चालू किया गया, लेकिन वह भी बीच-बीच में बंद होता रहा। इससे प्रेस वार्ता में मौजूद पत्रकारों को कांग्रेस नेताओं की बातें सुनने और सवाल-जवाब करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। जिस कार्यक्रम का मकसद मीडिया के जरिए कांग्रेस का संदेश जनता तक पहुंचाना और पत्रकारों के सवालों का जवाब देना था, वहां कार्यकर्ताओं की भीड़ और तकनीकी अव्यवस्थाएं हावी नजर आईं।
अब सवाल उठ रहा है कि जब कार्यक्रम प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आयोजित किया गया था, तो पत्रकारों के लिए पर्याप्त माइक, स्पीकर और बैठने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। आखिर ऐसी कौन सी वजह रही कि प्रदेश प्रभारी को पत्रकारों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए चिल्लाकर बोलना पड़ा। फिलहाल प्रेस वार्ता का यह वीडियो और वहां की अव्यवस्थाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

