इंदौर। शारदीय नवरात्रि और गरबा आयोजनों से पहले मध्य प्रदेश में गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता उषा ठाकुर ने गरबा आयोजनों में पहचान छिपाकर आने वालों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने गरबा को धार्मिक आस्था और शक्ति की साधना से जुड़ा पर्व बताते हुए आयोजकों से सतर्क रहने की अपील की है।
उषा ठाकुर का कहना है कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर या नाम बदलकर गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं और युवतियों को भ्रमित करते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की एंट्री रोकने की मांग की है। इससे पहले भी वह गरबा आयोजनों में पहचान पत्र के आधार पर प्रवेश की बात कह चुकी हैं।
इसी बयान के साथ उषा ठाकुर ने हर साल करीब साढ़े चार लाख लड़कियों के दूसरे धर्म के लोगों के साथ चले जाने और करीब नौ लाख बच्चों के जन्म से जनसांख्यिकी में बदलाव होने का दावा भी किया है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में किसी आधिकारिक आंकड़े, सरकारी रिपोर्ट या अध्ययन का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इस आंकड़े को उषा ठाकुर के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। पुराने समय में भी उनके इसी तरह के आंकड़ों वाले दावों की रिपोर्टिंग हुई है, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों से उनकी पुष्टि नहीं हुई थी।
उषा ठाकुर ने गरबा आयोजनों के बदलते स्वरूप पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पारंपरिक गरबा शक्ति की उपासना और साधना से जुड़ा रहा है, लेकिन व्यावसायिक आयोजनों में धार्मिक भावना के बजाय कपड़ों, गहनों और टैटू के प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान दिखाई देता है। वर्ष 2025 में भी उन्होंने गरबा में युवतियों के पहनावे और आयोजनों के व्यावसायीकरण को लेकर इसी तरह की चिंता जताई थी।
गरबा पंडालों में पहचान और प्रवेश को लेकर उषा ठाकुर का यह रुख नया नहीं है। वर्ष 2014 में विधायक रहते हुए भी उन्होंने गैर-हिंदू युवकों को गरबा पंडालों में प्रवेश नहीं देने की अपील की थी। वर्ष 2022 और 2024 में भी उन्होंने गरबा आयोजनों में पहचान पत्र के आधार पर प्रवेश की मांग उठाई थी।
अब नवरात्रि से पहले उनके ताजा बयान ने गरबा आयोजनों में प्रवेश, धार्मिक पहचान और आयोजनों के स्वरूप को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। उषा ठाकुर की मांग और उनके किए गए दावों पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि गरबा आयोजक और प्रशासन प्रवेश को लेकर क्या व्यवस्था अपनाते हैं।

