मध्यप्रदेश के रतलाम में दिवाली के मौके पर एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो सच में कुबेर के खजाने जैसा दिखता है। रतलाम के माणक चौक स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में हर साल दिवाली पर करोड़ों की धन-संपदा से सजा यह मंदिर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। यहां भक्तजन सोना, चांदी, नोटों की गड्डियां और हीरे-मोती चढ़ाते हैं, जो मंदिर को एक अलौकिक चमक दे देते हैं।
कुबेर के खजाने जैसा दृश्य
मंदिर में पांच दिन तक चलने वाले इस भव्य दीपोत्सव में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। यहां चढ़ाया गया धन, आभूषण और बहुमूल्य वस्तुएं बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में लौटा दी जाती हैं। यही वजह है कि इस परंपरा को लोग “कुबेर का खजाना” कहते हैं। सोने-चांदी से सजे इस मंदिर में श्रद्धालु दूर-दूर से सिर्फ इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए आते हैं।
धनतेरस पर बंटती हैं कुबेर की पोटलियां
यहां हर साल धनतेरस से शुरुआत होती है। शुभ मुहूर्त में मंदिर में कुबेर की पोटलियां भी बांटी जाती हैं। जो लोग अपना धन मंदिर में नहीं रख पाते, वे इन पोटलियों को प्रसाद के रूप में घर ले जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसे तिजोरी में रखने से घर में धन और समृद्धि की वृद्धि होती है।
कड़ी सुरक्षा और आधुनिक व्यवस्था
इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा के इंतजाम भी बेहद सख्त रहते हैं। मंदिर परिसर में 8 सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है और पुलिस जवान हर समय मुस्तैद रहते हैं। इस साल भी दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस की सुबह कलेक्टर मिशा सिंह और एसपी अमित कुमार ने परिवार सहित महालक्ष्मी जी की पूजा अर्चना कर की।
रतलाम का यह महालक्ष्मी मंदिर हर दिवाली पर न सिर्फ भक्ति, बल्कि समृद्धि और आस्था का चमकता हुआ प्रतीक बन जाता है — जहां सचमुच लगता है मानो कुबेर का खजाना धरती पर उतर आया हो।

