नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिला के सूखाखैरी गांव में आयोजित श्री रामचरितमानस पाठ और विष्णु यज्ञ के दौरान स्वामी सदानंद सरस्वती ने सनातन धर्म, आचार्य परंपरा और गो-रक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और मुखर विचार रखे। द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि हमारे आचार्यों के प्रति ऐसा कोई भी आचरण नहीं होना चाहिए जिससे सनातन धर्म को ठेस पहुंचे। उन्होंने संकेतों में अपने गुरु भाई अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का समर्थन करते हुए कहा कि शंकराचार्य पद किसी प्रशासनिक निर्णय या प्रमाणपत्र से तय नहीं होता, बल्कि यह सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित है।
उन्होंने देश में हिंदू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि जब अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों पर सरकारी हस्तक्षेप नहीं है तो हिंदू मंदिरों पर नियंत्रण क्यों। गो-रक्षा के मुद्दे पर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इस विषय पर होने वाले आंदोलनों को दबाना या षड्यंत्र करना उचित नहीं है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि कल्पना कभी सिद्ध नहीं होती, सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और संत समाज में शंकराचार्य पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनका यह बयान खासा चर्चा का विषय बन गया है।

