आलीराजपुर। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। लेकिन जब यही राखी जेल की सलाखों के बीच बंधे, तो भावनाएं और भी गहरी हो जाती हैं। आलीराजपुर के जोबट जेल में रक्षाबंधन के मौके पर कुछ ऐसा ही भावुक नजारा देखने को मिला, जहां बहनों ने अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके बेहतर भविष्य की कामना की।
जेल की चारदीवारी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बहनों को अपने भाइयों से मिलने और उन्हें राखी बांधने का अवसर दिया गया। जेलर उज्वला वाघमरे के मुताबिक, बड़वानी जिला जेल के निर्देश पर जोबट जेल में 122 बंदी-कैदियों के लिए रक्षाबंधन का आयोजन किया गया। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए और निर्धारित प्रक्रिया के तहत बहनें जेल पहुंचीं।
बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, उनकी कलाई पर राखी बांधी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। लंबे समय बाद जब बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तो कई बहनों की आंखें भी नम हो गईं। जेल का माहौल कुछ देर के लिए भावुक हो उठा।
लेकिन इस बार बहनों ने भाइयों से सिर्फ राखी की लाज रखने का वचन नहीं लिया, बल्कि जिंदगी बदलने का वादा भी मांगा। बहनों ने अपने भाइयों से अपील की कि जेल से बाहर आने के बाद वे दोबारा अपराध की राह पर न लौटें और अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिताएं।
बहनों की इस भावुक अपील पर भाइयों ने भी भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में गलत रास्ते से दूर रहने की कोशिश करेंगे और अपने जीवन को नई दिशा देंगे।
जोबट जेल में मनाया गया यह रक्षाबंधन इस बात की मिसाल बन गया कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन के रिश्ते की भावनाएं सलाखों के पीछे भी कमजोर नहीं पड़तीं।
कलाई पर बंधा राखी का छोटा सा धागा इस बार सिर्फ भाई की सुरक्षा का प्रतीक नहीं था, बल्कि एक बेहतर जिंदगी, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और अपराध छोड़कर नई शुरुआत करने का संदेश भी अपने साथ लेकर आया।

