ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक बार फिर महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के महिमामंडन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शहर के दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा कार्यालय में गोडसे की जयंती मनाई गई, जहां उसके चित्र पर माल्यार्पण किया गया, आरती उतारी गई और लड्डू बांटकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
कार्यक्रम में शामिल हिंदू महासभा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने नाथूराम गोडसे के समर्थन में नारेबाजी भी की। आयोजन के दौरान गोडसे को देशभक्त बताते हुए उसकी प्रतिमा देशभर के प्रमुख चौराहों पर लगाए जाने की मांग उठाई गई। हिंदू महासभा के पदाधिकारी पवन गुप्ता ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि अन्य क्रांतिकारियों की तरह नाथूराम गोडसे की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएं।
ग्वालियर का यह हिंदू महासभा कार्यालय पहले भी कई बार विवादों में रह चुका है। दावा किया जाता है कि देश में सबसे पहले यहीं नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाया गया था। हालांकि बाद में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए वहां से गोडसे की मूर्ति हटाकर जब्त कर ली थी।
अब एक बार फिर गोडसे जयंती के आयोजन और प्रतिमा लगाने की मांग ने पूरे प्रदेश में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे के महिमामंडन को आखिर किस हद तक अनुमति दी जानी चाहिए। वहीं इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो सकती हैं।

