ग्वालियर। दतिया विधानसभा उपचुनाव में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है और वह है वरिष्ठ नेता अवधेश नायक। चुनावी मुकाबले के बीच भाजपा और कांग्रेस दोनों ही उन्हें अपने साथ बनाए रखने या जोड़ने की कोशिश में जुटी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अवधेश नायक इस चुनाव में दोनों दलों के लिए कितने अहम हो गए हैं।
भाजपा ने अवधेश नायक को साधने की कोशिश तेज कर दी है। पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी उनके निवास पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में लंबी चर्चा हुई। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को अवधेश नायक की संभावित ‘घर वापसी’ से जोड़कर देखा जा रहा है।
उधर कांग्रेस भी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी अवधेश नायक से मिलने पहुंचे और उन्हें पार्टी के साथ बने रहने के लिए मनाने की कोशिश की। इससे साफ है कि दोनों दल अवधेश नायक को लेकर पूरी तरह सक्रिय हैं।
बताया जा रहा है कि अवधेश नायक की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह उन्हें उपचुनाव में टिकट न मिलना है। हाल ही में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के नामांकन और चुनावी सभा में उनकी गैरमौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी। इतना ही नहीं, कांग्रेस की स्टार प्रचारकों की सूची में भी उनका नाम शामिल नहीं किया गया, जिससे उनके समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है।
अवधेश नायक का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वे लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे, लेकिन 2023 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार भी घोषित किया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद टिकट बदलकर किसी और को प्रत्याशी बना दिया गया। तभी से उनके समर्थकों में असंतोष बना हुआ है।
अब उपचुनाव के बीच एक बार फिर उनकी भूमिका चर्चा का विषय बन गई है। भाजपा उनकी वापसी की संभावनाएं तलाश रही है, जबकि कांग्रेस उन्हें अपने साथ बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
अब सबकी निगाहें अवधेश नायक के अगले फैसले पर टिकी हैं। उनका राजनीतिक कदम दतिया उपचुनाव के समीकरणों को बदल सकता है और चुनावी मुकाबले को नया मोड़ दे सकता है।

