पन्ना। बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य बड़ी विकास योजनाओं से प्रभावित आदिवासियों और किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। छतरपुर और पन्ना जिलों में चल रहा ‘चिता आंदोलन’ तीसरे दिन भी जारी रहा, जहां बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार अपनी मांगों को लेकर डटे रहे।
आंदोलन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पर्याप्त सहमति और उचित प्रक्रिया के उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है। उनका कहना है कि ग्राम सभाओं की अनदेखी की गई, जबकि जल, जंगल और जमीन उनके जीवन का आधार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन के बाद उनका जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए बिजली आपूर्ति बाधित की गई और राशन, पेयजल तथा जरूरी दवाओं की उपलब्धता प्रभावित की जा रही है। उनका कहना है कि इस वजह से आंदोलन स्थल पर मौजूद परिवारों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि परियोजना से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जिन्हें जल्द सार्वजनिक किया जाएगा।
इस बीच, आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का समर्थन भी मिल रहा है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

