लोकल से ग्लोबल: MSME, ODOP और GI टैग से दुनिया में बढ़ी मध्यप्रदेश की पहचान

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 12 वर्षों में आत्मनिर्भरता को लेकर जो अभियान शुरू हुआ, उसका असर अब राज्यों में भी साफ दिखाई देने लगा है। मध्यप्रदेश भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME सेक्टर, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ODOP योजना और GI टैग आज विकास की नई पहचान बन चुके हैं। इन पहलों के जरिए स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को नए अवसर मिल रहे हैं और प्रदेश के उत्पाद राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहे हैं।

ODOP योजना के तहत प्रदेश के हर जिले की विशेष पहचान को सामने लाया गया है। धार का बाग प्रिंट, मुरैना की गजक, रीवा का सुंदरजा आम, शिवपुरी की जैकेट और चंदेरी की प्रसिद्ध साड़ियां आज देशभर में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। मध्यप्रदेश के 26 उत्पादों को अब तक GI टैग मिल चुका है, जिससे उनकी विशिष्टता और प्रामाणिकता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

प्रदेश सरकार ने उज्जैन में ODOP उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 284 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल बनाने की घोषणा भी की है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और ब्रांडिंग उपलब्ध कराना है।

आज भोपाल की जरी-जरदोजी, धार का बाग प्रिंट, बुरहानपुर का केला, बड़वानी का अदरक, बालाघाट का चिन्नौर चावल और मंदसौर का लहसुन जैसे उत्पाद देश-दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। सरकार इन उत्पादों के उत्पादन, प्रशिक्षण, पैकेजिंग और मार्केटिंग को लेकर भी विशेष प्रयास कर रही है। मृगनयनी एम्पोरियम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इनकी बिक्री लगातार बढ़ रही है।

GI टैग ने भी मध्यप्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को नई ताकत दी है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगी है, कारीगरों और किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल रहा है और निर्यात के नए रास्ते खुले हैं। स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं को भी इससे संरक्षण मिला है।

वहीं MSME सेक्टर आज मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है। प्रदेश में 24 लाख से अधिक MSME इकाइयां संचालित हैं, जो करोड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। सरकार की नई MSME विकास नीति 2025 के तहत वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदायों को भी स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से युवाओं को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बन सकें।

प्रदेश में रेडीमेड गारमेंट्स, फर्नीचर और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में आधुनिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर निवेश बढ़ रहा है और नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

MSME, ODOP और GI टैग का यह संगम आज मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती पहचान, मजबूत होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बढ़ते निर्यात के साथ मध्यप्रदेश अब “वोकल फॉर लोकल” से आगे बढ़कर “ग्लोबल फॉर लोकल” की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *