मंडला। मध्य प्रदेश का मंडला जिला इन दिनों कला और संस्कृति के रंगों में डूबा हुआ है। विश्व प्रसिद्ध चित्रकार और पद्म विभूषण सैयद हैदर रजा की स्मृति में आयोजित ‘रजा स्मृति उत्सव’ ने पूरे शहर को एक बार फिर सृजन और सौंदर्य के उत्सव में बदल दिया है।
रजा फाउंडेशन द्वारा 18 से 23 जुलाई तक आयोजित इस छह दिवसीय कला महोत्सव में देशभर के वरिष्ठ और युवा कलाकार एक मंच पर जुटे हैं। यहां लकड़ी की नक्काशी, गोंड और भील चित्रकला, माटी पर कलाकारी और छातों पर पेंटिंग जैसे कई रचनात्मक रूप लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
मंडला जिले के बबैया गांव में जन्मे सैयद हैदर रजा ने बहुत छोटी उम्र में कला की दुनिया में कदम रखा था। कहा जाता है कि उनकी कला यात्रा “शून्य” से शुरू हुई और आगे चलकर उनका “बिंदु” पूरी दुनिया में उनकी पहचान बन गया।
रजा साहब को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया। हालांकि उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा फ्रांस में बिताया, लेकिन मंडला की मिट्टी और अपनी जन्मभूमि से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहा।
पिछले एक दशक से आयोजित हो रहा यह उत्सव अब केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए प्रेरणा और अवसर का मंच बन चुका है। इस बार भी देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया और युवा प्रतिभाओं को सीखने का मौका मिला।
रजा स्मृति उत्सव की सबसे खास बात यह है कि यहां पारंपरिक कला और आधुनिक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिलता है। स्थानीय कलाकारों और आदिवासी समुदाय के लिए यह आयोजन पहचान, सम्मान और आजीविका का माध्यम भी बन रहा है।
एक कलाकार, जिसने “शून्य” से अपनी शुरुआत की और “बिंदु” के जरिए दुनिया में भारत की कला को नई पहचान दिलाई, आज उसी की स्मृति में मंडला की धरती पर हजारों रंग बिखरे हुए हैं। रजा स्मृति उत्सव न सिर्फ उनकी विरासत को जीवित रखे हुए है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी सृजन का नया रास्ता दिखा रहा है।

