ग्वालियर। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। इस मामले में सुनवाई से पहले सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी, यानी सीईसी ने अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में अवैध खनन पर रोक लगाने और अभयारण्य की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं।
सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि चंबल अभयारण्य के भीतर आने वाली राजस्व भूमि को अगले छह महीने के भीतर संरक्षित वन घोषित किया जाए। समिति का मानना है कि इससे अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
रिपोर्ट में हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी सिफारिश की गई है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित थर्मल कैमरे, पीटीजेड कैमरे और ड्रोन की मदद से पूरे क्षेत्र पर नजर रखने की योजना प्रस्तावित की गई है। साथ ही, छह महीने के भीतर एक अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की बात भी कही गई है।
सीईसी ने चंबल से जुड़े सभी जिलों में संयुक्त निगरानी और प्रवर्तन समितियां बनाने का सुझाव दिया है, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। इसके अलावा, अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों, फाइनेंसरों और आरोपियों का एक साझा डिजिटल डाटाबेस तैयार करने की भी अनुशंसा की गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चंबल क्षेत्र के प्रमुख पुलों पर एआई आधारित ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लगाए जाएं, जिससे संदिग्ध वाहनों की पहचान की जा सके। वन्यजीव संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की भी बात कही गई है।
सीईसी ने मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी लाइसेंस प्राप्त रेत भंडारण केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है, ताकि अवैध रूप से निकाली जाने वाली रेत के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट 22 जुलाई को सुनवाई करेगा। ऐसे में सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण बल्कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

